रांची से पटना यात्रा के दौरान लापता
जन सुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर देवपालिक गुप्ता सोमवार को रांची रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार हुए थे। इकतीस वर्षीय देवपालिक गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के निवासी हैं। वे दिल्ली के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के पूर्व छात्र भी रहे हैं। रांची से पटना की यात्रा के लिए उन्होंने जनशताब्दी एक्सप्रेस को चुना था। ट्रेन दोपहर करीब 2:25 बजे रांची से अपने गंतव्य की ओर रवाना हुई थी। यात्रा के कुछ समय बाद ही वे ट्रेन के अंदर से अचानक गायब हो गए। उनके गायब होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और रेलवे प्रशासन मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। फिलहाल उनके साथ सवार रहे सहकर्मियों और मित्रों ने इस बाबत जानकारी दी है कि वे ट्रेन के अंदर काफी देर तक नहीं मिले, जिसके बाद हड़कंप मच गया। घटना के बाद से ही उनके परिजनों में भारी चिंता व्याप्त है। अभी तक उनका कोई अता-पता नहीं चला है और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है।
सहकर्मी की आपबीती और पुलिस जांच
देवपालिक गुप्ता के साथ यात्रा कर रहे उनके मित्र और सहकर्मी गौतम कुमार ने पूरी घटना का विवरण दिया है। गौतम के अनुसार, ट्रेन के चलने के लगभग 10 मिनट बाद देवपालिक ने उन्हें बताया कि वे खाने-पीने का कुछ सामान खरीदने के लिए पैंट्री कार की ओर जा रहे हैं। जब वे काफी समय तक वापस अपनी बर्थ पर नहीं लौटे, तो गौतम ने पैंट्री कार जाकर उनकी तलाश की। पैंट्री कार में मौजूद नहीं होने पर उन्होंने ट्रेन के हर कोच में उन्हें ढूंढा, लेकिन वे कहीं नहीं मिले। इसके बाद मुरी जंक्शन पर ट्रेन रुकते ही उन्होंने वहां की राजकीय रेलवे पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मुरी जंक्शन पर तैनात आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव सिंह ने जानकारी दी कि वे रेलवे के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक पड़ताल में यह स्पष्ट हो चुका है कि मुरी में ट्रेन रुकने के दौरान देवपालिक ट्रेन से नीचे नहीं उतरे थे। वर्तमान में उनका मोबाइल फोन भी पूरी तरह से बंद आ रहा है, जिससे संपर्क करने के सभी प्रयास विफल हो रहे हैं।
संयुक्त दल द्वारा तलाश का प्रयास
घटना के बाद मुरी जंक्शन पर मौजूद रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस ने मिलकर एक विशेष टीम का गठन किया है। इस टीम का मुख्य उद्देश्य देवपालिक गुप्ता का पता लगाना है। अधिकारी हर संभव कोशिश में जुटे हैं ताकि डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर के ठिकाने का पता लगाया जा सके। अभी तक उनके लापता होने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन अधिकारी विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। चूंकि मुरी तक उनके उतरने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, इसलिए पुलिस अब आगे के स्टेशनों पर भी नजर बनाए हुए है। यह मामला डिजिटल जगत के एक कर्मी से जुड़ा होने के कारण भी चर्चा में है। जन सुराज पार्टी के पदाधिकारियों और सहयोगियों के लिए यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। पुलिस की संयुक्त टीम तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी कैमरों की मदद से निरंतर तलाश अभियान को जारी रखे हुए है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रेलवे विभाग और पुलिस प्रशासन उन्हें सकुशल बरामद कर पाते हैं या नहीं।