रांची में मौसम का उड़ानों पर असर झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर मौसम की अचानक हुई भारी खराबी के कारण विमानों की आवाजाही बुरी तरह बाधित हो गई। दृश्यता कम होने और लगातार प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते विमान चालकों के लिए रनवे पर विमान उतारना बेहद जोखिम भरा हो गया था। इस अप्रत्याशित संकट से निपटने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तत्काल प्रभाव से सुरक्षा दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया और विमानों को सुरक्षित दिशा में मोड़ने का निर्देश जारी किया। इस दौरान इंडिगो एयरलाइंस की कुल चार उड़ानों को निर्धारित समय पर रांची में लैंड करने की अनुमति नहीं मिल सकी। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए विमानन कंपनियों ने अपने पायलटों के साथ मिलकर यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया कि विमानों को नजदीकी वैकल्पिक गंतव्यों की ओर डायवर्ट किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से पूरी तरह बचा जा सके और सभी यात्री सुरक्षित बने रहें।
वाराणसी और लखनऊ में सुरक्षित लैंडिंग रांची में उतरने में असमर्थ रही इंडिगो की चारों उड़ानों को उनके वैकल्पिक रूट के अनुसार उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख शहरों की ओर मोड़ दिया गया। इनमें से कुछ विमानों को वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा गया जबकि शेष विमानों ने लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग पूरी की। उत्तर प्रदेश के इन दोनों प्रमुख महानगरों के विमानन केंद्रों पर पहले से ही ऐसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और तकनीकी प्रणालियां उपलब्ध होती हैं। एयरलाइंस के स्थानीय प्रबंधन और ग्राउंड स्टाफ ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए विमानों के उतरने के बाद सभी यात्रियों की सुविधा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। इस दौरान यात्रियों को विमान के भीतर ही कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा और स्थिति सामान्य होने के बाद उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान करने का प्रयास किया गया ताकि किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
यात्रियों को हुई परेशानी और प्रबंधन अचानक उड़ान मार्ग में हुए इस बड़े बदलाव के कारण यात्रियों को अपने तयशुदा कार्यक्रमों में भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रांची पहुंचने वाले कई व्यापारी, छात्र और अन्य नागरिक बीच रास्ते में ही वाराणसी और लखनऊ में फंस गए। हालांकि एयरलाइंस कंपनियों और विमानन अधिकारियों ने इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में संयम से काम लेते हुए यात्रियों को लगातार स्थिति की जानकारी दी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच बेहतर तालमेल के कारण ही इन सभी विमानों को सुरक्षित रूप से नीचे उतारा जा सका। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्राकृतिक बाधाएं आधुनिक तकनीक के दौर में भी हवाई सफर को प्रभावित करती हैं और ऐसे में पायलटों तथा ग्राउंड कंट्रोल का त्वरित निर्णय ही बड़ी दुर्घटनाओं को टालने में मुख्य भूमिका निभाता है। स्थिति में सुधार होने के बाद इन विमानों को उनके गंतव्य की ओर दोबारा रवाना करने की प्रक्रिया शुरू की गई।