अनेक राज्यों में सक्रिय हुआ मानसून का नया दौर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश के अठारह विभिन्न राज्यों में झमाझम बारिश होने की पूरी संभावना है जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे महत्वपूर्ण भूभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से आसमान में बादलों का डेरा था और अब हवा के कम दबाव के क्षेत्र के कारण व्यापक स्तर पर वर्षा दर्ज की जा रही है। किसानों के लिए यह मानसूनी गतिविधि जहाँ एक ओर राहत का संदेश लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर आम जनजीवन के दैनिक क्रियाकलापों में भी इसके कारण खासा बदलाव देखने को मिल रहा है। स्थानीय मौसम केंद्रों द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी अचानक होने वाले बदलाव से जनता को समय रहते अवगत कराया जा सके और जिला प्रशासन भी अपनी तरफ से पूरी तरह मुस्तैद स्थिति में नजर आ रहा है।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों पर विशेष नजर समुद्र तट के पास स्थित ओडिशा और पश्चिम बंगाल राज्यों के लिए मौसम विभाग ने गंभीर चेतावनी जारी की है क्योंकि यहाँ समुद्री तूफानी हवाओं के साथ भारी वर्षा का अंदेशा जताया गया है। इन दोनों पूर्वी राज्यों के तटीय जनपदों में मछुआरों को समुद्र के भीतर न जाने की सख्त सलाह दी गई है और बंदरगाहों पर खतरे के संकेत भी प्रदर्शित कर दिए गए हैं। इसके विपरीत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बादलों की आवाजाही के बीच उमस भरा मौसम लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। तेज धूप और उच्च आर्द्रता के मिले-जुले असर के कारण उमस का स्तर काफी बढ़ गया है जिससे दिल्लीवासियों को पसीने वाली चिपचिपी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है और वे झमाझम फुहारों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
आगामी दिनों में जनजीवन और कृषि पर पड़ने वाला प्रभाव मौसम के इस बदले हुए मिजाज का सीधा असर देश की कृषि व्यवस्था और शहरी यातायात पर पड़ना लाजिमी है क्योंकि लगातार होने वाली बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नागरिकों को आवागमन में किसी प्रकार की भारी असुविधा का सामना न करना पड़े। दूसरी तरफ कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जिन इलाकों में लंबे समय से सूखे जैसे हालात या पानी की कमी महसूस हो रही थी, वहाँ की फसलों के लिए यह वर्षा अमृत के समान साबित होगी। हालांकि अत्यधिक पानी जमा होने से कुछ संवेदनशील फसलों को नुकसान की आशंका भी बनी रहती है जिसके चलते किसान लगातार खेतों की स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।