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मौसम की मार: जयपुर में मानसून कमजोर, डीग और फलोदी में सामान्य से अधिक बारिश

राजस्थान में इस बार का मानसूनी सीजन काफी असमान रहा है। राजधानी जयपुर में जहां बारिश ने पूरी तरह से निराशाजनक प्रदर्शन किया है, वहीं डीग और फलोदी जिलों में उम्मीद से ज्यादा पानी बरसा है।

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Ankit Yadav
31 अग 2026, 12:18
मौसम की मार: जयपुर में मानसून कमजोर, डीग और फलोदी में सामान्य से अधिक बारिश
राजस्थान भर में इस मानसूनी सीजन के दौरान मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां कई बड़े क्षेत्रों में बादलों की बेरुखी साफ तौर पर महसूस की जा रही है, वहीं कुछ चुनिंदा इलाकों में झमाझम बारिश ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस असमान बारिश के पैटर्न ने आम जनजीवन के साथ-साथ कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े विभागों की चिंता को भी बढ़ा दिया है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में लोग अच्छी मानसूनी बौछार का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बादलों की आवाजाही केवल कुछ ही जिलों तक सीमित होकर रह गई है।

जयपुर में बारिश की भारी कमी

जयपुर जिले की बात करें तो इस बार मानसूनी सीजन में बादलों ने खासी कंजूसी बरती है। राजधानी और इसके आसपास के इलाकों में पर्याप्त बारिश न होने के कारण स्थिति काफी सूखी नजर आ रही है। स्थानीय लोगों और किसानों को उम्मीद थी कि सीजन के इस दौर में अच्छी बरसात होगी, लेकिन बादलों के बिना बरसे ही निकल जाने से निराशा हाथ लगी है। इस स्थिति के कारण भूजल स्तर में सुधार की उम्मीदों को भी झटका लगा है और आने वाले दिनों में पानी की किल्लत की आशंका पर चर्चा शुरू हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ की फसलों को बचाने के लिए किसानों को सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर भारी खर्च करना पड़ सकता है।

डीग और फलोदी में राहत भरी स्थिति

इसके विपरीत, राज्य के डीग और फलोदी जिलों में मौसम पूरी तरह मेहरबान नजर आया है। इन दोनों ही क्षेत्रों में इस मानसूनी सीजन के दौरान सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे वहां का परिदृश्य पूरी तरह हरा-भरा हो गया है। इन इलाकों में अच्छी बारिश होने से स्थानीय जलाशयों और तालाबों में पर्याप्त पानी एकत्र हो गया है, जिससे किसानों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इन चुनिंदा स्थानों पर मानसून का सिस्टम बेहद सक्रिय रहा, जिसके कारण तय कोटे से अधिक पानी बरसा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की स्थानीय भिन्नता मानसून के कमजोर और खंडित होने के कारण पैदा होती है। कई बार वायुमंडलीय दबाव और बादलों की दिशा बदलने के कारण एक ही राज्य के दो अलग-अलग जिलों में ज़मीन-आसमान का फर्क देखने को मिलता है। फिलहाल मौसम विभाग पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में राज्य के अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई जा रही है, हालांकि जयपुर जैसे सूखे इलाकों में राहत की बड़ी उम्मीद अभी नजर नहीं आ रही है।
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