बंगal की खाड़ी का चक्रवात बना मानसूनी बदलाव की मुख्य वजह भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस समय देश के मौसम चक्र में एक बेहद महत्वपूर्ण और नाटकीय परिवर्तन दर्ज किया जा रहा है जिसकी मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी केीय क्षेत्र में विकसित हुआ एक नया चक्रवाती सिस्टम है। इस मौसमी हलचल के प्रभावस्वरूप उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक बादलों की आवाजाही और वर्षा के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल रही है जहां एक तरफ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के आसपास का इलाका साफ आसमान और सूखे मौसम का सामना कर रहा है वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश और बिहार से लेकर सीधे झारखंड तक के विशाल भौगोलिक भूभाग में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो चुका है। मौसम विज्ञानियों का यह आकलन है कि चक्रवात के इस अप्रत्याशित रुख के कारण मानसूनी हवाओं की दिशा और गति पूरी तरह से प्रभावित हुई है जिसके चलते नमी से भरे हुए बादल अपनी निर्धारित पारंपरिक रेखा से भटककर विशेष रूप से पूर्वी और मध्यवर्ती राज्यों की तरफ तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।
तेरह राज्यों में जारी किया गया भारतीय मौसम विभाग का अलर्ट देश के कुल तेरह अलग-अलग राज्यों में मौसम विभाग की तरफ से यह उच्च स्तरीय चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब सामान्य तौर पर मानसूनी गतिविधियों के विदा होने या कमजोर पड़ने का अनुमान लगाया जाता है। सामान्य प्रक्रिया के तहत जब कभी बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में इस तरह के मौसमी दबाव या चक्रवात का निर्माण होता है तो तटीय क्षेत्रों से लेकर अंदरूनी मैदानी इलाकों तक भारी उथल-पुथल मच जाती है जिससे कृषि क्षेत्र जल संसाधन प्रबंधन और रोजमर्रा की आवाजाही पर सीधा असर पड़ता है। झारखंड तथा इसके पड़ोसी राज्यों में इस मानसूनी सक्रियता के कारण निचले इलाकों में जलभराव नदियो और नालों के उफान पर आने तथा ग्रामीण इलाकों में खेती किसानी के कामकाजों पर विपरीत प्रभाव पड़ने की पूरी आशंका बनी हुई है क्योंकि इस अवधि में अचानक होने वाली अत्यधिक वर्षा से तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। संस्थागत स्तर पर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन इकाइयों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जनजीवन को सुरक्षित रखा जा सके।
आगामी दिनों में मौसम के इस मिजाज का व्यापक असर आने वाले दिनों में मौसम के इस बदले हुए रुख का सीधा प्रभाव आम जनजीवन के साथ-साथ परिवहन और कृषि व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है क्योंकि झारखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार हो रही वर्षा से तापमान में तो गिरावट दर्ज की जाएगी किंतु इसके साथ ही यातायात बाधित होने और बिजली आपूर्ति व्यवस्था के चरमराने का खतरा भी बढ़ जाएगा। मौसम विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बंगाल की खाड़ी में बना यह चक्रवाती परिसंचरण पूरी तरह से कमजोर होकर समाप्त नहीं हो जाता तब तक देश के इन तेरह प्रभावित राज्यों में बादलों का डेरा और रुक-रुककर भारी बारिश का सिलसिला इसी प्रकार जारी रहने की पूरी संभावना है। स्थानीय नागरिकों और किसानों को विशेष सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन पर लगातार नजर बनाए रखें और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए सतर्कता बरतें ताकि प्रशासन द्वारा जारी होने वाले दिशा-निर्देशों का समय पर पालन किया जा सके।