तेरह राज्यों से मानसून की विदाई
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार आगामी अड़तालीस घंटों के भीतर देश के कई बड़े क्षेत्रों से दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह विदा हो जाएगा। जिन प्रमुख हिस्सों से इसके लौटने की पूरी संभावना जताई गई है उनमें पंजाब और हरियाणा राज्य शामिल हैं। इसके अलावा राजस्थान के कुछ इलाके तथा उत्तर प्रदेश के बचे हुए शेष हिस्से भी इसी दायरे में आते हैं। गुजरात राज्य के साथ-साथ मध्य प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में भी मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। संपूर्ण जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय अंचलों के अलावा उत्तराखंड राज्य से भी मानसून की विदाई तय मानी जा रही है। बिहार और झारखंड जैसे पूर्वी राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ की सीमाओं और महाराष्ट्र के कुछ चुनिंदा हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदलने लगा है। विभाग का कहना है कि इन सभी स्थानों पर मानसून के पीछे लौटने के लिए पूरी तरह अनुकूल मौसमी स्थितियां बन चुकी हैं और अगले दो दिनों के भीतर बारिश की गतिविधियों में काफी कमी दर्ज की जाएगी। देश के बाकी हिस्सों में अब वर्षा का दौर थमने की तरफ बढ़ रहा है और लोग लंबे समय से चली आ रही उमस भरी गर्मी से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
केरल में ऑरेंज अलर्ट और बारिश
दक्षिण भारतीय राज्य केरल में बारिश का सिलसिला अभी थमा नहीं है बल्कि कुछ जिलों में इसका प्रभाव काफी तीव्र बना हुआ है। बीते गुरुवार को केरल के विभिन्न हिस्सों में हुई झमाझम वर्षा के कारण वहां के नागरिकों को पिछले कई हफ़्तों से लगातार बढ़ रहे तापमान से बहुत बड़ी राहत मिली है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के तीन प्रमुख जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित कर दिया है। इन संवेदनशील जिलों में पथानामथिट्टा के साथ कोट्टायम और इडुक्की का नाम शामिल है जहां भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। इन तीन जिलों के अलावा प्रशासन ने छह अन्य जिलों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। दूसरी तरफ देश की राजधानी दिल्ली में आज आसमान मुख्य रूप से बिल्कुल साफ रहने की बात कही गई है। दिल्ली के भीतर आज अधिकतम तापमान तेरह से पैंतीस डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किए जाने की पूरी संभावना है जबकि न्यूनतम तापमान इक्कीस से तेरह डिग्री सेल्सियस के दायरे में रह सकता है। दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से कुछ कम रिकॉर्ड किया गया है और दिन के वक्त बीस किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं।
पूर्वोत्तर में भारी बारिश और सीजन का आँकड़ा
मौसम विभाग के विस्तृत आंकड़ों के अनुसार समाप्त हुए इस मानसून सीजन यानी जून से लेकर सितंबर के बीच पूरे देश भर में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इस पूरी अवधि के दौरान भारत में लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी दीर्घकालिक औसत का सतासी दशमलव चार प्रतिशत पानी बरसा है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक सामान्य तौर पर इस सीजन में आठ सौ अड़सठ दशमलव छह मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष कुल सात सौ उनसठ दशमलव चार मिलीमीटर वर्षा ही रिकॉर्ड की जा सकी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्ष दो हजार एक के बाद से देश में हुई यह चौथी सबसे कम मानसूनी बारिश है और एक जून से तीस सितंबर के बीच लगभग तेरह प्रतिशत की कमी बनी रही। इसके बावजूद पूर्वोत्तर राज्यों में अभी भी कुछ स्थानों पर भारी मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी रहने वाला है। पूर्वानुमान के अनुसार दो से सात अक्टूबर के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में वर्षा हो सकती है। इसके साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी बादल बरसने की पूरी संभावना बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और बंगाल के कुछ क्षेत्रों में दो से तीन अक्टूबर के बीच बारिश होने की उम्मीद है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा में कहीं-कहीं गरज के साथ बिजली गिरने और तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है जो कुछ जगहों पर पचास किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।