आगामी महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों और स्थानीय निकायों के निर्वाचनों को निष्पक्षता से संपन्न कराने के उद्देश्य से भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश भर में 'स्पेशल इन-डेप्थ वोटर वेरिफिकेशन' (SIR) अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का प्रत्यक्ष सत्यापन कर रहे हैं। आयोग का मुख्य लक्ष्य मतदाता सूची से दोहरे नाम, स्थानांतरित (Shifted) हो चुके व्यक्तियों और मृत मतदाताओं के नाम हटाना है, ताकि निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित हो सके।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, बीएलओ मोबाइल ऐप और डिजिटल प्री-प्रिंटेड फॉर्म्स के जरिए मतदाताओं के पते, फोटो और विवरण की जांच कर रहे हैं। जिन मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूचियों (2002-2004) से मैप हो चुके हैं, उनसे अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग नहीं की जा रही है, जिससे आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आयोग ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को भी अपने पोलिंग स्टेशन स्तर के प्रतिनिधियों (BLA) को इस प्रक्रिया में शामिल करने का सुझाव दिया है।
इस देशव्यापी सत्यापन प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा, जिस पर आम नागरिक और राजनीतिक दल अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि एक-एक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना आयोग की प्राथमिकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस डिजिटल सत्यापन अभियान से फर्जी वोटिंग की गुंजाइश खत्म होगी और देश की लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया पर जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।