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MOTN सर्वे: पीएम पद के लिए नरेंद्र मोदी अभी भी जनता की पहली पसंद बने हुए हैं
देश में राजनीतिक समीकरणों और जनता के मूड को लेकर आए ताजा सर्वे के नतीजे सामने आ चुके हैं, जिसमें प्रधानमंत्री पद की पसंद को लेकर दिलचस्प आंकड़े दर्ज किए गए हैं।
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Ankit Yadav
28 अग 2026, 13:38
भारतीय राजनीतिक परिदृश्य को लेकर कराए गए बहुप्रतीक्षित मूड ऑफ द नेशन यानी MOTN सर्वे के आंकड़े अब सार्वजनिक हो चुके हैं। इस ताज़ा सर्वेक्षण में देश के नागरिकों से उनके राजनीतिक रुझानों और नेतृत्व को लेकर कई तीखे सवाल पूछे गए, जिनके नतीजों से देश की राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सर्वे के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से जनता की राय को एकत्रित किया गया है ताकि यह समझा जा सके कि मौजूदा समय में मतदाता देश की बागडोर किसके हाथों में देखना चाहते हैं। इस तरह के सर्वेक्षण राजनीतिक दलों के लिए भी अपनी रणनीतियों को नए सिरे से आंकने का एक बड़ा जरिया साबित होते हैं।
नरेंद्र मोदी का जलवा बरकरार
नतीजों के मुताबिक, देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी भी नागरिकों की सर्वोच्च पसंद के रूप में शीर्ष पर बने हुए हैं। जनता के एक बड़े वर्ग ने उनके कामकाज और नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताया है, जिससे यह साफ होता है कि राजनीतिक उठापटक के बीच भी उनका जनाधार मजबूत स्थिति में है। वहीं दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी इस सूची में दूसरे स्थान पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे हैं। इन दोनों शीर्ष नेताओं के बीच की स्थिति देश की द्वि-ध्रुवीय राजनीतिक वास्तविकता को भी दर्शाती है, जहां मुकाबला मुख्य रूप से इन्हीं चेहरो के इर्द-गिर्द घूमता नजर आता है। हालांकि, इस पूरे सर्वे का सबसे बड़ा आकर्षण और हैरानी भरा पहलू वह तीसरा नाम रहा है जिसने लोगों को चौंका दिया है।
इस सर्वे में तीसरे पायदान पर उभरे नाम ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है क्योंकि इसकी उम्मीद शायद ही आम जनता ने की थी। यह इस बात का संकेत है कि देश के मतदाता अब पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से परे जाकर अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं या क्षेत्रीय क्षत्रपों की भूमिका को नए सिरे से तौल रहे हैं। हालांकि इस तीसरे नाम को लेकर अभी और भी कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन इसने यह साबित कर दिया है कि भविष्य का भारतीय राजनीतिक परिदृश्य काफी रोचक होने वाला है। इस प्रकार के सर्वेक्षण न सिर्फ जनता की नब्ज टटोलते हैं, बल्कि आगामी चुनावों की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के जनमत संग्रह आने वाले समय में राजनीतिक दलों के लिए आईना का काम करेंगे। खासकर आगामी चुनावी राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले गठबंधनों के लिए ऐसे आंकड़े बहुत मायने रखते हैं। जब जनता किसी नेता को अपनी पहली या दूसरी पसंद बताती है, तो उसके पीछे महंगाई, बेरोजगारी, विकास और सुरक्षा जैसे तमाम मुद्दे काम कर रहे होते हैं। आने वाले दिनों में इन सर्वे के नतीजों पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो जाएंगी, जिससे देश का राजनीतिक तापमान और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है।