कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल में बाढ़: चीन पर उठ रहे सवालों पर क्या कह रहा है अंतरराष्ट्रीय मीडिया      दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं हिमालय के ग्लेशियर, 5 महीने पहले इस रिपोर्ट ने दी थी नेपाल में तबाही की चेतावनी      Balen Shah India: भारत ने बाढ़ के महासंकट में न‍िभाई दोस्‍ती, नेपाली PM बालेन शाह पहले विदेशी दौरे पर आएंगे द‍िल्‍ली      Raksha Bandhan 2026 Wishes: बड़े भाई से छोटे भाई तक, हर रिश्ते के लिए भेजें ये खास मैसेज, दिल में घुल जाएगा...      सोनिया गांधी की किताब में क्या है कि पेंगुइन ने छापने से किया इनकार, कौन सा हिस्सा हटाने को कहा      मुस्कान मर्डर केस में सामने आया CCTV वीडियो, हत्या के बाद भागता दिखा आरोपी इमरान      'भाजपा ने चुनाव हाईजैक किया, बंगाल पुलिस राक्षस बन गई है', ममता ने लगाए गंभीर आरोप      महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों को मिली बड़ी राहत, मराठी सीखने के लिए सरकार ने दी 1 साल की मोहलत     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
राजनीति

एक देश एक चुनाव: जेपीसीसी की बैठक में प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता शामिल

देश में एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा पर विचार-विमर्श जारी है। इसी सिलसिले में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और विपक्ष के तमाम प्रमुख चेहरे नजर आए।

A
Ankit Yadav
25 अग 2026, 11:22
एक देश एक चुनाव: जेपीसीसी की बैठक में प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता शामिल
देश की राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से 'एक देश, एक चुनाव' की अवधारणा पर चर्चा तेज हो चुकी है। इस सिलसिले में आयोजित की गई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मंथन देखने को मिला। भारतीय संसदीय व्यवस्था में इस बड़े बदलाव को लेकर देश भर में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जहां सरकार इसे प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टिकोण से एक बेहद जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसके कई पहलुओं पर अपनी गहरी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। इसी क्रम में हुई इस खास बैठक ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

बैठक में विपक्षी नेताओं की सक्रिय भागीदारी

संसद और लोकतांत्रिक प्रणाली से जुड़े इस बड़े विषय पर चर्चा के लिए बुलाई गई इस बैठक में कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे। कांग्रेस पार्टी की प्रमुख नेता प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विपक्ष के कई अन्य वरिष्ठ सांसद और नेता भी इस मंच पर नजर आए। बैठक का मुख्य एजेंडा एक साथ चुनाव कराए जाने की संभावनाओं और उसके प्रभावों का आकलन करना था। सभी पक्षों ने इस प्रस्ताव के तकनीकी, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर खुलकर अपनी बात रखी। विपक्षी खेमे की तरफ से इस बात पर जोर दिया गया कि इस तरह के दूरगामी परिणामों वाले बदलावों से पहले तमाम संवैधानिक संस्थाओं और संघीय ढांचे की बारीकी से समीक्षा होना अनिवार्य है। संविधान निर्माताओं द्वारा परिकल्पित हमारी चुनावी व्यवस्था में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने का इतिहास रहा है, जिसे बाद के दशकों में विभिन्न कारणों से अलग-अलग समय पर आयोजित किया जाने लगा। अब केंद्र सरकार इस पुरानी व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के प्रयासों में जुटी हुई है ताकि देश में बार-बार होने वाले चुनावों के खर्च और प्रशासनिक मशीनरी पर पड़ने वाले भारी दबाव को कम किया जा सके। हालांकि, विपक्षी दलों का तर्क है कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में अलग-अलग समय पर चुनाव होना स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय मुद्दों से अलग रखने में मदद करता है और संघवाद की भावना को जीवित रखता है।

आगामी राजनीतिक रणनीतियां और भविष्य की राह

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर एक बड़ा राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बनने वाला है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इसके पक्ष में जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इस बात पर अड़े हैं कि किसी भी जल्दबाजी में किए गए संशोधन से लोकतंत्र की मूल भावना को नुकसान पहुंच सकता है। आने वाले दिनों में इस समिति की रिपोर्ट और इसके निष्कर्षों पर देश की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह फैसला आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति की पूरी दिशा और दशा तय करने की क्षमता रखता है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज