राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के सांसदों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने, जिसकी अगुवाई पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ सांसद सुप्रिया सुले कर रही थीं, नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक मुलाकात की। लगभग 20 मिनट तक चली इस सौहार्दपूर्ण बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और ढांचागत विकास से संबंधित ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस प्रतिनिधिमंडल में शरद पवार गुट के सभी आठ नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद शामिल रहे।
बैठक के बाद संसद भवन के बाहर पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुप्रिया सुले ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के विभिन्न जिलों में जारी सूखे जैसी स्थिति, कृषि संकट और किसानों की समस्याओं को प्रधानमंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखा। विशेष रूप से नासिक, अहमदनगर और सोलापुर जिलों के प्याज उत्पादक किसानों की गिरती कीमतों, निर्यात नीतियों की अनिश्चितता और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटियों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया गया। इसके अतिरिक्त, पंढरपुर जाने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा और पवित्र चंद्रभागा नदी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग की गई।
विवादास्पद राजनीतिक मुद्दों से दूर रही चर्चा
पार्टी सूत्रों और सांसदों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस शिष्टाचार मुलाकात के दौरान केवल राज्य के विकास, जनहित और बजटीय आवंटन से संबंधित विषयों पर ही बात हुई। संसद में चल रहे राजनीतिक गतिरोध, विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन या आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से जुड़े विवादास्पद मुद्दों पर इस बैठक में कोई चर्चा नहीं की गई। सांसदों ने अपने-अपने संबंधित संसदीय क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं, जैसे कि राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, रेल कनेक्टिविटी और सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्रीय निधि से संबंधित अलग-अलग ज्ञापन भी प्रधानमंत्री को सौंपे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनसीपी (एसपी) सांसदों के ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देने का आश्वासन दिया। सुप्रिया सुले ने कहा कि राज्य के विकास के हित में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाते हुए केंद्र सरकार के साथ संवाद बनाए रखना उनकी पार्टी की नीति रही है। इस मुलाकात को राजनीतिक गलियारों में एक परिपक्व संसदीय परंपरा के रूप में देखा जा रहा है।