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मोहन भागवत का अमेरिका दौरा: अमेरिकी आयोग की मांग पर हिंदू संगठनों ने क्यों जताई कड़ी आपत्ति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया अमेरिका दौरे को लेकर उपजा विवाद और अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की टिप्पणियों के खिलाफ प्रवासी हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया पर आधारित विशेष रिपोर्ट।

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Ankit Yadav
22 अग 2026, 11:44
मोहन भागवत का अमेरिका दौरा: अमेरिकी आयोग की मांग पर हिंदू संगठनों ने क्यों जताई कड़ी आपत्ति
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर कूटनीतिक और वैचारिक हलचल तेज हो गई है। उनके इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने प्रवासी भारतीयों और विभिन्न हिंदू संगठनों को मुखर होने पर मजबूर कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की तरफ से उठाई गई कुछ खास मांगें और टिप्पणियां हैं, जिन्हें लेकर अमेरिका में सक्रिय भारतीय और हिंदू समुदाय में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

USCIRF की मांगें और संगठनों का तीखा विरोध

विभिन्न हिंदू संगठनों का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि अमेरिकी आयोग द्वारा इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप करना और एकतरफा मांगें रखना पूरी तरह से अनुचित है। संगठनों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि इस तरह के बयानों से न केवल तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है, बल्कि विदेशों में रह रहे शांतिप्रिय प्रवासी समुदाय की भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है। मोहन भागवत के इस दौरे के समय जिस प्रकार का माहौल बनाने का प्रयास किया गया, उसकी विभिन्न प्रवासी समुदायों ने कड़ी निंदा की है और इसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक संगठनों के खिलाफ एक प्रायोजित एजेंडा करार दिया है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैचारिक प्रभाव

विश्लेषकों का मानना है कि मोहन भागवत जैसे शीर्ष वैचारिक व्यक्तित्व की विदेश यात्राओं के दौरान इस तरह के विवादों का उठना कोई नया नहीं है। वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत और संघ की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता से कई ऐसे संगठन असहज महसूस करते हैं जो वैचारिक रूप से भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि जब भी संघ नेतृत्व विदेश यात्रा पर होता है, तो विभिन्न मानवाधिकार या धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर सक्रिय होने वाले संगठन इस प्रकार के मुद्दों को हवा देने का प्रयास करते हैं ताकि कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके।

भविष्य की प्रतिक्रियाएं और कूटनीतिक निहितार्थ

आगामी दिनों में इस विवाद के और अधिक तूल पकड़ने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में रह रहे हिंदू समुदाय अब संगठित होकर ऐसे बयानों का वैचारिक और कानूनी रूप से जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय संगठनों का कहना है कि वे दुनिया के किसी भी कोने में अपने सांस्कृतिक प्रतीकों और नेतृत्व का अपमान सहन नहीं करेंगे। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक पटल पर भारत से जुड़े वैचारिक और सामाजिक मुद्दों पर नजर रखने वाले संस्थान किस प्रकार राजनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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