कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल में बाढ़ : चीन पर उठ रहे सवालों पर क्या कह रहा है अंतरराष्ट्रीय मीडिया      Balen Shah India: भारत ने बाढ़ के महासंकट में न‍िभाई दोस्‍ती, नेपाली PM बालेन शाह पहले विदेशी दौरे पर आएंगे द‍िल्‍ली      Raksha Bandhan 2026 Wishes: बड़े भाई से छोटे भाई तक, हर रिश्ते के लिए भेजें ये खास मैसेज, दिल में घुल जाएगा...      सोनिया गांधी की किताब में क्या है कि पेंगुइन ने छापने से किया इनकार, कौन सा हिस्सा हटाने को कहा      कैलाश मानसरोवर यात्रा का तिब्बत रूट कितना मुश्किल है, रास्ते में क्या चुनौतियां आती हैं?      ₹22,000 करोड़ के कर्ज का सिर्फ ₹6.5 करोड़ में निपटारा: NCLT ने सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी;...      अभिजीत दीपके ने अरविंद केजरीवाल को पछाड़ दिया! सर्वे में CJP चीफ ने चौंकाया      CM विजय तय सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच बैठे: सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया, तमिलनाडु विधानसभा में ऐसा पह...     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
राजनीति

नैतिक पतन: भारतीय राजनीति में बढ़ती अमर्यादित भाषा और गाली-शास्त्र

भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में लगातार गिरते स्तर और अमर्यादित बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है, जहां लोकतांत्रिक मर्यादाएं तार-तार हो रही हैं।

X
Kantap News डेस्क
15 अग 2026, 12:32
नैतिक पतन: भारतीय राजनीति में बढ़ती अमर्यादित भाषा और गाली-शास्त्र
भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद हमेशा से वैचारिक भिन्नता और स्वस्थ संवाद पर टिकी रही है। परंतु समय के साथ इसमें एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिला है, जिसे राजनीतिक गलियारों में 'गाली-शास्त्र' का नाम दिया जा रहा है। सार्वजनिक मंचों और चुनावी रैलियों में नेताओं द्वारा जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह न केवल राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ है बल्कि संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा को भी ठेस पहुँचा रहा है।

बढ़ता वैचारिक क्षरण

राजनीति में संवाद की संस्कृति अब व्यक्तिगत हमलों और अमर्यादित टिप्पणियों में तब्दील होती जा रही है। नीतिगत मुद्दों पर बहस करने के बजाय विपक्षी नेताओं को नीचा दिखाने के लिए जिस तरह के शब्दों का चयन किया जाता है, वह हमारे राजनीतिक पतन का स्पष्ट प्रमाण है। इससे न केवल जनप्रतिनिधियों की छवि धूमिल होती है, बल्कि आम जनता और विशेषकर युवा पीढ़ी पर भी इसका अत्यंत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोकतंत्र की चौखट पर इस प्रकार की भाषा का सामान्यीकरण देश के भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते राजनीतिक दलों और उनके नेतृत्व ने इस पर आत्ममंथन नहीं किया और भाषाई संयम नहीं अपनाया, तो हमारी लोकतांत्रिक संस्कृति को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी। यह समय राजनीतिक शुचिता को पुनर्जीवित करने और गरिमामयी संवाद को वापस लाने का है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज