आज राजधानी दिल्ली में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने नई शिक्षा नीति (NEP) के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया। इस विस्तार के साथ ही, गठबंधन सरकार ने अपने सहयोगियों को महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपकर एकजुटता का संदेश दिया है। नई नीति के तहत, अब प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव होंगे, जिसमें स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। कैबिनेट ने देश भर में स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 50,000 करोड़ रुपये के विशेष बजट को भी मंजूरी दी है।
कैबिनेट विस्तार के निहितार्थ
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विस्तार से सरकार आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। नए कैबिनेट मंत्रियों में युवाओं और अनुभवी नेताओं का मिश्रण है, जो विकास कार्यों में तेजी ला सकते हैं। विपक्ष ने हालांकि इस कदम को राजनीतिक पैंतरा बताया है, लेकिन सरकार का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह से देश के प्रशासनिक हित में है। मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा इस तरह किया गया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कोई रुकावट न आए।
शिक्षा नीति का प्रभाव
नई शिक्षा नीति का प्राथमिक उद्देश्य छात्रों को कौशल-आधारित शिक्षा प्रदान करना है ताकि वे वैश्विक बाजार के लिए तैयार हो सकें। कोडिंग, एआई और व्यावहारिक प्रशिक्षण अब स्कूली शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा होंगे। शैक्षणिक संस्थानों में अब रटने के बजाय अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी संस्थानों को भी इस नई प्रणाली का पालन करना होगा। आने वाले शैक्षणिक वर्ष से इस नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसकी निगरानी के लिए हर राज्य में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।