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राजनीति ब्रेकिंग

राजनीतिक घमासान: अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में तुष्टिकरण के लिए देश के विभाजन की नींव डाली

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम विवाद को लेकर विपक्ष पर करारा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 1937 में तुष्टिकरण की राजनीति के तहत देश के बंटवारे की नींव रख दी थी।

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Ankit Yadav
21 अग 2026, 12:20
राजनीतिक घमासान: अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में तुष्टिकरण के लिए देश के विभाजन की नींव डाली
देश की राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से इतिहास और वैचारिक मुद्दों को लेकर गर्मागर्म बहस छिड़ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक तीखा बयान देते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस पार्टी ने साल 1937 के दौरान अपनी तुष्टिकरण की नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए ही राष्ट्र के विभाजन की नींव रख दी थी, जिसके परिणाम बाद में देश को भुगतने पड़े। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न राजनीतिक मंचों पर राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक फैसलों को लेकर लगातार बयानबाजी का दौर जारी है।

वंदे मातरम विवाद और विपक्ष की भूमिका

अमित शाह ने यह बयान विशेष रूप से वंदे मातरम से जुड़े हालिया विवाद और विपक्ष के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया। उनका कहना था कि विपक्षी दल अपनी पुरानी रणनीतियों के तहत आज भी समाज को बांटने वाली राजनीति कर रहे हैं। गृह मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दलों के नेताओं की तरफ से इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के ऐतिहासिक मुद्दों को उठाकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावों के लिए अपनी वैचारिक जमीन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किस प्रकार उस दौर के राजनीतिक घटनाक्रमों ने भारतीय उपमहाद्वीप के भविष्य को प्रभावित किया। शाह के अनुसार, तुष्टिकरण की जो शुरुआत उस समय की गई थी, उसका प्रभाव बाद के दशकों में देश की राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। भारतीय जनता पार्टी हमेशा से स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कई फैसलों और उसके बाद की नीतियों के लिए कांग्रेस पार्टी की आलोचना करती रही है, और यह ताज़ा बयान उसी वैचारिक संघर्ष की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में विपक्ष की तरफ से इस पर क्या पलटवार किया जाएगा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता अमूमन ऐसे बباनों पर कड़ी आपत्ति जताते हैं और भाजपा पर इतिहास को अपने राजनीतिक लाभ के लिए मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाते रहे हैं। बहरहाल, इस ताजा बयान ने एक बार फिर से देश की राजनीति में ऐतिहासिक बहसों को केंद्र में ला दिया है, जिससे आने वाले हफ्तों में राजनीतिक गर्मागरमी और बढ़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
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