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राजनीति

स्वतंत्रता दिवस पर सियासी दूरी: लाल किले के समारोह में मल्लिकार्जुन खर्गे और राहुल गांधी की गैरहाजिरी से बवाल

भारत के अस्सीवें स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के शामिल न होने से नया राजनीतिक विवाद छिड़ गया है।

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Kantap News डेस्क
16 अग 2026, 17:13
स्वतंत्रता दिवस पर सियासी दूरी: लाल किले के समारोह में मल्लिकार्जुन खर्गे और राहुल गांधी की गैरहाजिरी से बवाल
देश भर में अस्सीवें स्वतंत्रता दिवस का जश्न अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जा रहा था, लेकिन राजधानी दिल्ली स्थित लाल किले पर आयोजित मुख्य राजकीय समारोह से कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की दूरी ने एक नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में होने वाले इस राष्ट्रीय उत्सव के मुख्य कार्यक्रम से किनारा कर लिया। इस घटना के सामने आते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, और दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

बैठने की व्यवस्था पर असंतोष

कांग्रेस पार्टी के सूत्रों की ओर से सफाई देते हुए यह कहा गया कि समारोह के दौरान वरिष्ठ नेताओं के बैठने की व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताएं और असंतोष था, जिसके कारण उन्होंने इस कार्यक्रम में शामिल न होने का निर्णय लिया। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्रीय पर्व और देश के प्रधानमंत्री के पद का अपमान करार दिया है। सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र और राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर भी राजनीति करना और व्यक्तिगत या दलीय प्राथमिकताओं को देश से ऊपर रखना कांग्रेस की ओछी मानसिकता को दर्शाता है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट तक हर जगह गर्मजोशी से बहस छिड़ गई है।

राष्ट्रीय पर्वों का राजनीतिकरण

इस प्रकार की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व भी अब राजनीतिक मतभेदों और छींटाकशी का शिकार होने लगे हैं। जनता के बीच इस बात को लेकर गहरी निराशा है कि देश के सबसे बड़े उत्सव पर भी राजनीतिक दल आपसी कलह को भुला नहीं पा रहे हैं। लोकतंत्र में असहमति का अपना एक स्थान होता है, लेकिन राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीकों से जुड़े कार्यक्रमों में इस तरह की दूरियां देश के आम नागरिकों को आहत करती हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि राजनीतिक दल इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।
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