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राजनीति

तमिलनाडु विधानसभा में राज्य गीत पर बड़ा प्रस्ताव पारित: 'तमिल थाई वाझथु' को मिला सर्वोच्च स्थान

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने विधानसभा में राज्य गीत 'तमिल थाई वाझथु' को सभी सरकारी और शैक्षणिक आयोजनों में सबसे पहले गाए जाने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कराया।

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Kantap News डेस्क
10 अग 2026, 16:34
तमिलनाडु विधानसभा में राज्य गीत पर बड़ा प्रस्ताव पारित: 'तमिल थाई वाझथु' को मिला सर्वोच्च स्थान

तमिलनाडु विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य की भाषाई स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने स्वयं सदन के पटल पर एक विशेष शासकीय संकल्प पेश किया, जिसके तहत राज्य के आधिकारिक एंथम 'तमिल थाई वाझथु' को राज्य में आयोजित होने वाले सभी प्रकार के सरकारी कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों की सभाओं, विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों और सार्वजनिक उपक्रमों के आयोजनों में सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। अब से इन सभी कार्यक्रमों की शुरुआत अनिवार्य रूप से राज्य गीत के गायन से ही होगी। इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को बिना किसी विरोध के पूरे सदन द्वारा सर्वसम्मति से ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

प्रस्ताव को पटल पर रखते हुए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सदन में एक भावुक और ओजस्वी भाषण दिया। उन्होंने कहा, "तमिल केवल एक भाषा नहीं है; यह हमारी पहचान, हमारी संस्कृति, हमारा गर्व और हमारी ताकत का आधार है। 'तमिल' शब्द का उच्चारण करते ही दुनिया के हर कोने में रहने वाला तमिल भाषी एक सूत्र में बंध जाता है। राज्य गीत 'तमिल थाई वाझथु' को हर आधिकारिक मंच पर प्रथम और सर्वोच्च स्थान देना हमारा संवैधानिक अधिकार और नैतिक कर्तव्य है।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि यह कानून राज्य की नई पीढ़ी के मन में अपनी मातृभाषा के प्रति अपार सम्मान और भाषाई गौरव की भावना को हमेशा जीवित रखेगा।

राजनीतिक दलों का समर्थन और नियम लागू करने के निर्देश

सदन में मौजूद सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस विधेयक की प्रशंसा करते हुए इसका पूर्ण समर्थन किया। विधानसभा से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास होने के तुरंत बाद राज्य के गृह विभाग, स्कूली शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा विभाग को विस्तृत कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी करने के निर्देश दे दिए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, जब भी 'तमिल थाई वाझथु' का गायन या वादन होगा, तब वहां उपस्थित सभी नागरिकों और अधिकारियों को सम्मान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।

केवल वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों को इस अनिवार्य नियम से छूट प्रदान की गई है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निजी शिक्षण संस्थानों में भी इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं। इस फैसले की जानकारी मिलते ही चेन्नई सहित पूरे राज्य में तमिल सांस्कृतिक संगठनों, साहित्यकारों और छात्र संघों ने खुशी का इजहार किया और इसे तमिल भाषा के ऐतिहासिक सम्मान का दिन बताया है।

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