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राजनीति

तीखा राजनीतिक हमला: मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी के बढ़ते दाम और कम स्टॉक पर केंद्र को घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में चीनी के बढ़ते दामों और कम होते भंडारों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है, साथ ही सरकार के आत्मनिर्भरता के दावों पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

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Ankit Yadav
23 अग 2026, 14:20
तीखा राजनीतिक हमला: मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी के बढ़ते दाम और कम स्टॉक पर केंद्र को घेरा
देश की राजनीति में इन दिनों आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दामों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने देश में मीठे यानी चीनी के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी और गोदामों में बचे कम स्टॉक के मुद्दों को उठाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और रसोई का बजट लगातार बिगड़ता जा रहा है।

आत्मनिर्भरता के दावों पर सवाल

देश में हर मोर्चे पर आत्मनिर्भरता का ढिंढोरा पीटने वाली सत्तारूढ़ पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए खड़गे ने बेहद तल्ख तेवर अपनाए। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार से सवाल किया कि आखिर किस तरह के आत्मनिर्भर भारत की बात की जा रही है जहां आम नागरिकों को जरूरी खाद्य पदार्थों के लिए भी इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि यदि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है और कीमतें आसमान छू रही हैं, तो यह सरकार की खराब आर्थिक और कृषि नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि सरकार जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुकी है और जनता की बुनियादी समस्याओं पर उसका कोई ध्यान नहीं है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश के आम आदमी की जेब पर पड़ता है। त्योहारों का सीजन नजदीक आते ही चीनी जैसी आवश्यक वस्तु की कीमतें बढ़ना और उसका स्टॉक कम होना एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। अर्थशास्त्रियों और जानकारों का भी मानना है कि यदि समय रहते आपूर्ति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक विकट हो सकती है। सरकार के पास ऐसे समय में बफर स्टॉक को मेंटेन रखने और जमाखोरों पर नकेल कसने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन विपक्षी दल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि प्रशासन इन मोर्चों पर पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। लखनऊ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस राजनीतिक बयानबाजी के बाद सुगबुगाहट तेज हो गई है। स्थानीय बाजारों और आम जनता के बीच भी महंगाई को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर सियासी घमासान और अधिक तीव्र होने के पूरे आसार हैं। विपक्षी दल इस मामले को जनता के बीच ले जाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, वहीं देखना यह होगा कि सत्ता पक्ष की ओर से इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और वे इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देते हैं।
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