बेल्जियम के वेव्रे में खेले गए रोमांचक मुकाबले में भारतीय हॉकी टीम ने आखिरी पल तक शानदार संघर्ष किया, लेकिन पेनल्टी शूटआउट में मेजबान बेल्जियम से 4-3 से हारकर विश्व कप के पदक दौर से बाहर हो गई। निर्धारित समय तक मुकाबला 3-3 की बराबरी पर रहा और दोनों टीमों के बीच पूरे मैच के दौरान कांटे की टक्कर देखने को मिली। भारत ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की और छठे मिनट में अभिषेक ने शानदार गोल करके टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। शुरुआती बढ़त के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने बेल्जियम पर दबाव बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन मेजबान टीम ने जल्द ही वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। इसके बाद बेल्जियम ने आक्रामक खेल जारी रखा और भारत के डिफेंस को लगातार चुनौती देते हुए 2-1 की बढ़त हासिल कर ली। भारतीय टीम पर दबाव बढ़ने के बावजूद खिलाड़ियों ने संयम नहीं खोया और बराबरी के लिए लगातार हमले किए।
हरमनप्रीत सिंह ने संभाली भारत की कमान
मुकाबले में भारतीय टीम की वापसी में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने अहम भूमिका निभाई। पेनल्टी कॉर्नर के जरिए मिले मौके को उन्होंने शानदार तरीके से गोल में बदलते हुए भारत को 2-2 की बराबरी दिला दी। इस गोल के बाद मुकाबला और भी रोमांचक हो गया और दोनों टीमें निर्णायक बढ़त हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करती रहीं। खेल के अंतिम चरण में बेल्जियम ने एक बार फिर गोल करके 3-2 की बढ़त हासिल कर ली और ऐसा लगने लगा कि भारतीय टीम अब मुकाबले से बाहर हो सकती है। हालांकि भारतीय खिलाड़ियों ने आखिरी सीटी तक हार नहीं मानी। मैच खत्म होने में महज 26 सेकंड बाकी थे, तभी हरमनप्रीत सिंह ने शानदार गोल दागकर स्कोर 3-3 कर दिया। उनके इस गोल ने भारतीय टीम को एक बार फिर मुकाबले में वापस ला दिया और मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से कराने की स्थिति पैदा हो गई। हरमनप्रीत का प्रदर्शन इस पूरे मुकाबले में भारत के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक बात रहा।
शूटआउट में बेल्जियम ने मारी बाजी
निर्धारित समय के बाद जीत का फैसला पेनल्टी शूटआउट में होना था, जहां दोनों टीमों के खिलाड़ियों पर जबरदस्त दबाव था। भारतीय टीम ने शूटआउट में जीत हासिल करने की पूरी कोशिश की, लेकिन बेल्जियम के अनुभवी गोलकीपर विंसेंट वानाश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय हमलों को नाकाम कर दिया। अंततः बेल्जियम ने शूटआउट में 4-3 से जीत दर्ज की और भारतीय टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। हालांकि हार के बावजूद भारत के कप्तान हरमनप्रीत सिंह का व्यक्तिगत प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 8 गोल किए और शीर्ष गोल स्कोरर बने रहे। बेल्जियम के खिलाफ भी उनके महत्वपूर्ण गोल ने भारत को आखिरी क्षणों तक मुकाबले में बनाए रखा। भारतीय टीम पदक दौर में जगह नहीं बना सकी, लेकिन खिलाड़ियों ने जिस तरह से दबाव के बीच संघर्ष किया और अंतिम 26 सेकंड में बराबरी हासिल की, वह उनके जुझारूपन को दर्शाता है। अब टीम के सामने इस मुकाबले से सीख लेकर अपनी कमियों को दूर करने और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती होगी।