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खेल और रोजगार: झारखंड के मैदानों में पसीना बहा रहे खिलाड़ियों की कमाई का पूरा गणित
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर झारखंड के खिलाड़ियों की मेहनत और उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। मैदान पर कड़ी मेहनत करने वाले इन एथलीटों की असल कमाई और रोजगार के अवसरों का पूरा गणित क्या है, आइए जानते हैं।
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Ankit Yadav
29 अग 2026, 12:23
राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर हर साल देश भर में खेल और खिलाड़ियों की उपलब्धियों का जश्न मनाया जाता है, लेकिन इसके साथ ही धरातल पर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन करना भी बेहद आवश्यक हो जाता है। झारखंड राज्य की बात करें तो यहाँ के प्रतिभावान खिलाड़ी देश और दुनिया के मंचों पर अपने कौशल का लोहा मनवा रहे हैं। वे ट्रेनिंग के दौरान घंटों मैदान में पसीना बहाते हैं, ताकि अपने प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकें। परंतु जब बात इनकी आजीविका और वित्तीय स्थिरता की आती है, तो कई सवाल खड़े होते हैं। खेल के क्षेत्र में कॅरियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय सुरक्षा की होती है।
कड़ी मेहनत बनाम आर्थिक लाभ की वास्तविकता
राज्य के विभिन्न जिलों से आने वाले ये खिलाड़ी बेहद संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से गुजरकर आगे बढ़ते हैं। कई खिलाड़ी ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं, जहाँ संसाधनों की भारी कमी होती है। इसके बावजूद वे अपनी लगन के दम पर आगे निकलते हैं। लेकिन क्या इस कड़ी मेहनत के अनुपात में उन्हें पर्याप्त आर्थिक लाभ या स्थायी रोजगार मिल पाता है? खेल और रोजगार के समीकरण को समझें तो यह स्पष्ट होता है कि कुछ चुनिंदा खेलों और शीर्ष स्तर के खिलाड़ियों को छोड़कर अधिकांश एथलीटों को आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। सरकारी नौकरियां सीमित हैं और प्राइवेट सेक्टर में खेलों को मिलने वाला समर्थन अभी भी उस स्तर पर नहीं पहुँचा है जहाँ हर प्रतिभावान खिलाड़ी को वित्तीय रूप से सुरक्षित किया जा सके।
रोजगार के अवसरों के अभाव के कारण कई बार प्रतिभावान खिलाड़ियों को अपने खेल से दूरी बनानी पड़ती है या फिर आजीविका चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। हालांकि राज्य सरकार और विभिन्न खेल संगठनों द्वारा खिलाड़ियों के लिए कई नीतियां और प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनका दायरा और ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन अभी भी पूरी तरह से संतोषजनक नहीं माना जा सकता है। सीधी भर्ती और फेलोशिप जैसी योजनाओं से कुछ खिलाड़ियों को राहत जरूर मिली है, परंतु इस दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की जरूरत है ताकि हर वह युवा जो खेल में अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
आने वाले समय में यह जरूरी हो गया है कि खेल को केवल एक शौक या शौक तक सीमित न रखकर इसे एक सुरक्षित और आकर्षक कॅरियर विकल्प के रूप में विकसित किया जाए। कॉर्पोरेट घरानों को भी आगे आकर खेल और खिलाड़ियों को गोद लेना चाहिए ताकि जमीनी स्तर पर वित्तीय सहयोग मिल सके। जब तक खिलाड़ियों को उनकी मेहनत के अनुसार उचित पारिश्रमिक और सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक खेल जगत में प्रतिभाओं का पूर्ण विकास होना कठिन रहेगा। राष्ट्रीय खेल दिवस हमें यही सोचने और एक बेहतर कार्ययोजना तैयार करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे झारखंड के होनहार खिलाड़ियों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो सके।