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नीतिगत विसंगति: राष्ट्रीय खेल दिवस पर 'एक जिला-एक खेल' मॉडल पर पुनर्विचार की मांग उठी

राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर खेल जगत और विभिन्न मंचों से 'एक जिला-एक खेल' मॉडल को लेकर नए सिरे से समीक्षा करने की जोरदार मांग की गई है।

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Ankit Yadav
30 अग 2026, 16:01
नीतिगत विसंगति: राष्ट्रीय खेल दिवस पर 'एक जिला-एक खेल' मॉडल पर पुनर्विचार की मांग उठी
देशभर में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विभिन्न खेल कार्यक्रमों और आयोजनों का सिलसिला जारी है, वहीं इस खास दिन पर खेल रणनीतियों को लेकर भी गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खेल विशेषज्ञों और जानकारों ने मौजूदा समय में लागू 'एक जिला-एक खेल' मॉडल के क्रियान्वयन और उसके व्यावहारिक परिणामों पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने के लिए बनाई गई इस नीति में कई तरह की खामियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए इस पर तत्काल पुनर्विचार किया जाना बेहद जरूरी है।

नीतिगत खामियां और ज़मीनी चुनौतियां

देश के विभिन्न हिस्सों में खेलकूद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर कई तरह की योजनाएं शुरू की गई हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि हर जिले के लिए केवल एक खेल को प्राथमिकता देना कई बार स्थानीय स्तर पर मौजूद अन्य खेल प्रतिभाओं के साथ अन्याय साबित होता है। कई जिलों में युवाओं की रुचि और पारंपरिक रूप से खेले जाने वाले खेलों की संख्या अधिक होती है, ऐसे में किसी एक खेल विशेष पर सारा प्रशासनिक और वित्तीय ध्यान केंद्रित होने से बाकी विधाओं के खिलाड़ी उपेक्षित महसूस करते हैं। इस व्यवस्था के कारण जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति के समग्र विकास में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। खेल प्रशासकों और जानकारों का यह भी तर्क है कि खेल नीतियों का निर्धारण करते वक्त स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। एक जैसी व्यवस्था सभी क्षेत्रों में समान रूप से सफल हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए नीति निर्माताओं को चाहिए कि वे खेल संघों, वरिष्ठ खिलाड़ियों और कोचों के साथ बैठकर इस पूरी योजना का मूल्यांकन करें। यदि समय रहते इस मॉडल में जरूरी संशोधन नहीं किए गए, तो ग्रामीण और छोटे शहरों से उभरने वाली कई प्रतिभावान खिलाड़ियों की खेप बीच में ही पिछड़ सकती है। इस मांग के सामने आने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संबंधित खेल मंत्रालय और प्रशासनिक विभाग इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। खेल प्रेमियों और एथलीटों को उम्मीद है कि सरकार उनकी इन चिंताओं को गंभीरता से सुनेगी और खेलो इंडिया तथा अन्य राष्ट्रीय अभियानों के तहत नीतियों में आवश्यक सुधार लाएगी, ताकि देश के हर कोने से खेल प्रतिभाएं बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकें।
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