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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग: भारत और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एस्टेरॉयड अध्ययन के लिए मिलाया हाथ

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के साथ मिलकर पृथ्वी के निकट आने वाले क्षुद्रग्रहों की निगरानी और उनके खनिज संसाधनों के अध्ययन के लिए एक संयुक्त अंतरिक्ष मिशन की घोषणा की है.

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Kantap News डेस्क
10 अग 2026, 00:00
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग: भारत और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एस्टेरॉयड अध्ययन के लिए मिलाया हाथ

अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देते हुए बेंगलुरु में आज इसरो और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के शीर्ष वैज्ञानिकों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस नए द्विपक्षीय समझौते के तहत दोनों एजेंसियां मिलकर 'एस्ट्रो-ट्रैक' नामक एक उन्नत अंतरिक्ष मिशन पर काम करेंगी। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के करीब से गुजरने वाले खतरनाक क्षुद्रग्रहों यानी एस्टेरॉयड की गति, आकार और उनके रासायनिक संघटन का सटीक अध्ययन करना है। अंतरिक्ष विज्ञानियों का मानना है कि यह मिशन भविष्य में किसी भी संभावित बाह्य अंतरिक्ष खतरे से हमारी पृथ्वी की रक्षा करने में अत्यंत मददगार साबित होगा।

उन्नत पेलोड और डीप स्पेस कम्युनिकेशन इस संयुक्त मिशन में इसरो अपने अत्याधुनिक ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) और चंद्रयान श्रृंखला से विकसित की गई नेविगेशन तकनीकों का उपयोग करेगा, जबकि यूरोपीय एजेंसी उच्च-रिजोल्यूशन वाले स्पेक्ट्रोमीटर और रडार पेलोड प्रदान करेगी। दोनों पक्षों के वैज्ञानिक डेटा साझाकरण और डीप स्पेस कम्युनिकेशन के लिए एक साझा नियंत्रण कक्ष स्थापित करेंगे। यह साझेदारी भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक मंच पर और अधिक सुदृढ़ करेगी और युवा वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों में सीधे भाग लेने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी।

भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पर नजर इस सहयोग का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू अंतरिक्ष खनिजों के व्यावसायिक उपयोग और अन्वेषण से जुड़ा हुआ है। क्षुद्रग्रहों पर मौजूद दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और खनिजों की उपस्थिति का आकलन करके वैज्ञानिक भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इस समझौते के बाद दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों और तकनीकी विश्वविद्यालयों के बीच छात्रों के आदान-प्रदान कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे, जिससे अनुसंधान और विकास कार्यों को अभूतपूर्व गति मिलेगी।

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