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एससीओ की रजत जयंती: निवेश, रक्षा, डिजिटल, ऊर्जा और शिक्षा पर विशेष जोर के साथ उज्बेकिस्तान में होगा आयोजन
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर महत्वपूर्ण बैठकों का दौर शुरू होने जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और विभिन्न सामरिक मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी।
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Ankit Yadav
29 अग 2026, 12:24
अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक बार फिर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की प्रासंगिकता और उसका विस्तार नए आयाम छू रहा है। संगठन अपनी स्थापना के पच्चीस वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है, जो इसकी ऐतिहासिक यात्रा और भू-राजनीतिक प्रभाव का प्रमाण है। इस विशेष अवसर पर आयोजित होने वाले सम्मेलनों और उच्चस्तरीय बैठकों में दुनिया भर के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजनों का यह सिलसिला आगामी उनतीस अगस्त से शुरू होकर एक सितंबर तक चलेगा, जिसमें सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने पर मुख्य रूप से विचार-विमर्श किया जाएगा।
प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
इस ऐतिहासिक वर्षगांठ के दौरान होने वाली चर्चाओं का दायरा काफी व्यापक रखा गया है। इसमें आपसी निवेश को बढ़ावा देने, रक्षा सहयोग को मजबूत करने, डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आपसी आदान-प्रदान को बढ़ाने जैसे अहम विषय शामिल हैं। आधुनिक दौर की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजिटल और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना इस मंच की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार हो चुका है। इसके अलावा, ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों पर भी रणनीतिक साझेदारी की रूपरेखा तैयार की जाएगी ताकि क्षेत्र के सभी देशों को निरंतर और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति मिल सके।
क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से रक्षा मामलों में तालमेल बिठाना हमेशा से एससीओ का एक केंद्रीय बिंदु रहा है। आतंकवाद, सीमा पार अपराध और उग्रवाद जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों को एक साझा मंच पर आकर अपनी खुफिया जानकारियों और सुरक्षा रणनीतियों को साझा करना होगा। शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए आदान-प्रदान कार्यक्रम शुरू करने तथा तकनीकी संस्थानों के बीच नेटवर्क बनाने पर भी जोर दिया जाएगा, जिससे युवाओं को रोजगार और उच्च शिक्षा के नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
उज्बेकिस्तान में आयोजित होने वाले इन आयोजनों की तैयारियां जोरों पर हैं। मेजबान देश के रूप में उज्बेकिस्तान सभी मेहमान राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि उच्चस्तरीय बैठकों का यह दौर पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न हो सके। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार के सम्मेलनों से कई बड़े समझौतों पर मुहर लग सकती है, जो आने वाले वर्षों में यूरेशियाई क्षेत्र के आर्थिक और सामरिक परिदृश्य को नया आकार देने का काम करेंगे।
वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं के बीच एससीओ देशों का यह जमावड़ा आपसी व्यापारिक संबंधों को पुनर्जीवित करने में मदद करेगा। व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए भी प्रस्ताव पेश किए जाने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह पच्चीसवीं वर्षगांठ का समारोह केवल जश्न तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भविष्य के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने का एक ऐतिहासिक अवसर साबित होगा, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।