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खतरनाक मौसम चक्र: सदी का सबसे भीषण एल नीनो बढ़ाएगा वैश्विक गर्मी और कृषि संकट
मौसम विज्ञान और जलवायु से जुड़ी एक बड़ी चेतावनी सामने आई है, जिसके मुताबिक सदी का सबसे शक्तिशाली और खतरनाक एल नीनो दुनियाभर में तापमान में भारी इजाफा करेगा और इसका सीधा असर भारत के कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा.
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Ankit Yadav
22 अग 2026, 14:33
दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसके केंद्र में इस सदी का सबसे शक्तिशाली और खतरनाक एल नीनो प्रभाव है। इस मौसमी परिघटना के कारण वैश्विक तापमान में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज किए जाने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और एल नीनो का यह घातक संयोजन आने वाले महीनों में पृथ्वी के कई हिस्सों में मौसम के मिस्टर को पूरी तरह से बदल कर रख देगा। इसका प्रभाव केवल समुद्री तापमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर स्थलीय जलवायु पर भी पड़ेगा, जिससे भीषण गर्मी और सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
भारत के कृषि क्षेत्र पर गहराएगा संकट
पैराग्राफ 2 में हम देखते हैं कि इस वैश्विक मौसमी बदलाव का सबसे बुरा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और खासकर ग्रामीण इलाकों पर पड़ने की पूरी आशंका है। भारत में कृषि आज भी बड़े पैमाने पर मानसून की बारिश पर निर्भर करती है। एल नीनो की वजह से अमूमन मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में या तो पर्याप्त बारिश नहीं होती या फिर सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जब समय पर और पर्याप्त वर्षा नहीं होती, तो खरीफ की फसलों की बुवाई से लेकर उनकी पैदावार तक पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे देश के अन्नदाताओं यानी किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है और बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है。
जलवायु विशेषज्ञों और कृषि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि यह एल नीनो अपने अनुमानित सबसे खतरनाक रूप में सामने आता है, तो सरकार और किसानों दोनों को ही इसके लिए पहले से कमर कसनी होगी। देश के अलग-अलग राज्यों में सिंचाई के वैकल्पिक साधनों को मजबूत करने और जल संरक्षण की पुरानी पद्धतियों को दोबारा जीवित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषकर धान और अन्य जल-सघन फसलों के उत्पादन पर इसका गहरा असर हो सकता है, जिससे निपटने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों द्वारा किसानों को समय-समय पर परामर्श दिए जाने की तैयारी की जा रही है।
भविष्य की रणनीतियां और वैश्विक चिंताएं
केवल भारत ही नहीं, बल्कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के कई अन्य विकासशील देश भी इस भयंकर एल नीनो के परिणामों को लेकर चिंतित हैं। वैश्विक मंचों पर लगातार यह चर्चा हो रही है कि किस प्रकार इस प्रकार के चरम मौसम चक्रों से होने वाले नुकसान को कम किया जाए। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय इस पर पैनी नजर रखे हुए है कि महासागरों की सतह का तापमान कितनी तेजी से बदल रहा है। आने वाले हफ्तों में मौसम विभाग की तरफ से और अधिक विस्तृत आंकड़े आने की उम्मीद है, जिसके आधार पर नीतियां निर्धारित की जाएंगी।
अंत में यह साफ है कि आने वाला समय पर्यावरण और कृषि दोनों दृष्टियों से अत्यधिक चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। सरकार, प्रशासनिक अमले और किसानों को आपसी तालमेल बिठाकर इस संभावित संकट का सामना करना होगा। खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अभी से खाद्यान्न भंडारों और वितरण प्रणालियों को दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आम जनता को महंगाई और खाद्य संकट से बचाया जा सके।