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विदेश

रणनीतिक सौगात: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सुखोई अपग्रेड और पांचवी पीढ़ी के जेट दे सकते हैं पुतिन

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के नजदीक आने के साथ ही रूस और भारत के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बड़ी चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा एक सौगात के रूप में रक्षा सौदों की घोषणा की संभावना जताई जा रही है।

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Ankit Yadav
22 अग 2026, 14:17
रणनीतिक सौगात: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सुखोई अपग्रेड और पांचवी पीढ़ी के जेट दे सकते हैं पुतिन
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक हलचल तेजी से बढ़ रही है और इसी कड़ी में आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्रतिष्ठित सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत को एक बहुत बड़ी सामरिक सौगात दे सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी और अधिक मजबूत होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। इस संभावित सौदे में भारतीय वायु सेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने वाली योजनाएं शामिल हो सकती हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही हैं।

सुखोई बेड़े का आधुनिकीकरण और नए जेट

भारतीय वायु सेना के रीढ़ कहे जाने वाले सुखोई लड़ाकू विमानों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सौ से अधिक सुखोई विमानों के आधुनिकीकरण पर गंभीर विचार चल रहा है, जिससे इन विमानों की मारक क्षमता और तकनीकी दक्षता में अभूतपूर्व सुधार होगा। इसके अलावा, आधुनिक युद्धक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पांचवी पीढ़ी के उन्नत जेट विमानों को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चाएं होने की संभावना है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव धरातल पर उतरता है, तो इससे भारतीय वायु सेना की ताकत में भारी इजाफा होगा और देश की रक्षा तैयारियां और अधिक पुख्ता हो जाएंगी। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में गहरा सहयोग रहा है। रूस हमेशा से भारत के सबसे भरोसेमंद रक्षा साझीदारों में से एक रहा है और कठिन समय में भी रक्षा साजो-सामान की आपूर्ति सुनिश्चित करता रहा है। ब्रिक्स जैसे बड़े मंच पर इस तरह की रणनीतिक घोषणाएं न केवल द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देती हैं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करती हैं। इस प्रकार के समझौतों से दोनों राष्ट्रों के बीच तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है, जो मेक इन इंडिया पहल के अनुकूल भी हो सकता है। आगामी शिखर सम्मेलन पर दुनिया भर के रक्षा विश्लेषकों और कूटनीतिज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं। इस प्रकार के बड़े रक्षा प्रस्तावों के अमलीजामा पहनाने से भारत की वायु रक्षा प्रणाली आने वाले दशकों के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगी। हालांकि, इन सभी संभावनाओं और प्रस्तावों पर आधिकारिक मुहर शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकों के बाद ही लगेगी, लेकिन शुरुआती संकेतों नहीं यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग एक नए और उच्चतर स्तर पर जाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
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