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वैश्विक भू-राजनीति: संसाधनों के हथियार बनने पर प्रधानमंत्री मोदी की दो टूक और भविष्य के डर दिखाने वालों पर प्रहार

लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और संसाधनों के रणनीतिक इस्तेमाल को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है।

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Kantap News डेस्क
17 अग 2026, 17:42
वैश्विक भू-राजनीति: संसाधनों के हथियार बनने पर प्रधानमंत्री मोदी की दो टूक और भविष्य के डर दिखाने वालों पर प्रहार
वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर जिस प्रकार से प्राकृतिक संसाधनों, ईंधन, महत्वपूर्ण दवाओं और उन्नत तकनीकों का उपयोग कूटनीतिक हथियारों के रूप में किया जा रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में इस प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि भारत किसी भी बाहरी दबाव या वैश्विक अनिश्चितता के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने उन तत्वों पर भी तीखा हमला बोला जो भविष्य को लेकर केवल नकारात्मकता और भय फैलाने का काम करते हैं, जबकि देश आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के नए आयाम

देश की संप्रभुता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सरकार ने हर मोर्चे पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है। बाहरी खतरों का मुंहतोड़ जवाब देने के साथ-साथ देश के भीतर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार कड़े और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। डिजिटल और तकनीकी मोर्चों पर भी देश को स्वावलंबी बनाने के प्रयास तेजी से जारी हैं ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह के अवरोध का असर आम नागरिकों के जीवन पर न पड़े।

आत्मनिर्भरता और वैश्विक सहयोग की नीति

भारत का दृष्टिकोण हमेशा से वसुधैव कुटुंबकम का रहा है, जिसके तहत देश अपनी सुरक्षा और समृद्धि के साथ-साथ वैश्विक शांति में भी अपना पूरा योगदान दे रहा है। आज दुनिया के कई देश भारत की आर्थिक और रणनीतिक नीतियों को एक आदर्श के रूप में देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों का आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचनाओं या डर का शिकार हुए बिना अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लें।
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