पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप के बड़े हिस्से इस समय इतिहास के सबसे भीषण ग्रीष्मकालीन लू (Heatwave) और जंगलों की आग (Wildfires) की चपेट में हैं। स्पेन, ग्रीस, फ्रांस और इटली जैसे देशों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जंगलों में फैली भयावह आग को बुझाने के लिए ग्रीस और स्पेन की सरकारों ने हजारों दमकलकर्मियों और सैन्य दस्तों को तैनात किया है, जबकि दर्जनों तटीय गांवों और पर्यटन स्थलों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और पर्यावरण निकायों ने रिपोर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार, अल नीनो प्रभाव और वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण इस तरह की चरम मौसमी घटनाएं अब हर साल अधिक तीव्र और लंबी होती जा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि केवल कार्बन उत्सर्जन घटाना ही काफी नहीं है, बल्कि तत्काल बुनियादी ढांचे को जलवायु-अनुकूल (Climate Adaptation) बनाना होगा।
इस संकट से निपटने के लिए यूरोपीय संघ ने आपातकालीन नागरिक सुरक्षा तंत्र को सक्रिय कर दिया है और प्रभावित देशों को अग्निशामक विमान तथा तकनीकी सहायता भेजी जा रही है। पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर कृषि, शहरी नियोजन और ऊर्जा क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में भीषण गर्मी और पानी की कमी से यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को अरबों डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।