वैश्विक स्तर पर तमाम तरह के भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति के दबाव और वित्तीय बाजारों में दिखने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार की चाल ने तमाम बड़ी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। हाल ही में मूडीज रेटिंग्स की ओर से जारी किए गए नए आर्थिक आंकड़ों और विकास अनुमानों के अनुसार, भारत इस चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य के बीच भी सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने पिछले अनुमानों की तुलना में सुधार करते हुए जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े को सात प्रतिशत के स्तर पर ला दिया है। यह संशोधन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश के भीतर घरेलू मांग लगातार उच्च बनी हुई है, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार दिख रहा है और सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे निरंतर पूंजीगत व्यय का सकारात्मक असर अब व्यापक रूप से धरातल पर नजर आने लगा है।
इस प्रकार के मजबूत आर्थिक पूर्वानुमानों के पीछे घरेलू खपत में वृद्धि, ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही मांग में सुधार और सेवा क्षेत्र का लगातार मजबूत प्रदर्शन मुख्य चालक के रूप में काम कर रहे हैं। पिछले कुछ तिमाहियों के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार की ओर से अपनाई गई मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों ने अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में एक ढाल का काम किया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था जब सुस्ती के दौर से गुजर रही है और कई विकसित देशों में मंदी की आशंकाएं बनी हुई हैं, तब भारत की ओर से सात प्रतिशत की यह अनुमानित वृद्धि दर निवेशकों और उद्योग जगत के भीतर एक नया भरोसा जगाने का काम कर रही है। मूडीज द्वारा यह आकलन ऐसे समय में सामने आया है जब पूरी दुनिया की निगाहें उभरते हुए बाजारों के नीतिगत फैसलों और विकास पैटर्न्स पर टिकी हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय बाजार के प्रति निवेशकों का आकर्षण और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
मूडीज की तरफ से आए इस ताज़ा अनुमान के बाद आने वाले महीनों में देश के भीतर औद्योगिक उत्पादन, रोजगार के नए अवसरों और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी एफडीआई के मोर्चे पर भी और अधिक तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। शेयर बाजार और कॉर्पोरेट सेक्टर के जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी तरह की बड़ी बाधा उत्पन्न नहीं होती है और घरेलू स्तर पर महंगाई दर नियंत्रण में बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था इस निर्धारित लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगी या इससे भी बेहतर प्रदर्शन करने में सफल होगी। इस तरह के सकारात्मक आंकड़ों से न केवल नीति निर्माताओं को भविष्य की आर्थिक नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की साख एक ऐसी मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित होगी जो किसी भी बाहरी संकट का मुकाबला करने की पूरी क्षमता रखती है।