चीन के बाजार पर भारत की खास नजर
भारत सरकार ने देश के विनिर्माण क्षेत्र और विभिन्न व्यावसायिक संगठनों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। चीनी बाजार का कुल आकार करीब 300 अरब डॉलर का है जिसमें भारतीय उत्पादों और सेवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने पर गंभीर विचार किया जा रहा है। सरकार इस भारी भरकम बाजार में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। वैश्विक व्यापार के वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश के निर्यातकों और उत्पादकों को इस विशाल अवसर का सीधा लाभ मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। इस रणनीति के तहत विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों से उनकी वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है ताकि नीतिगत स्तर पर सही और सटीक निर्णय लिए जा सकें।
इंडस्ट्री से मांगी गई बाधाओं की पूरी सूची
सरकार ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यावसायिक संघों से चीन के साथ व्यापार में आने वाली तमाम मुश्किलों की विस्तृत सूची मांगी है। व्यापारिक और विनिर्माण गतिविधियों से जुड़े लोगों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी सभी परेशानियों को सरकार के सामने खुलकर रखें। इस सूची के मिलने के बाद प्रशासन उन सभी बिंदुओं पर गहराई से विचार करेगा जो निर्यात को बढ़ावा देने में रुकावट पैदा कर रहे हैं। नीति निर्माताओं का मानना है कि जब तक मैदानी स्तर की अड़चनों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा तब तक वैश्विक बाजार में मुकाबला करना कठिन होगा। सभी संबंधित पक्षों से आंकड़े जुटाने की यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है ताकि जल्द से जल्द एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जा सके। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य भारतीय उत्पादों के लिए चीन के रास्ते में आने वाले हर तरह के अवरोधों को जड़ से खत्म करना है।
व्यापारिक पृष्ठभूमि और आगे की कार्ययोजना
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जानकारों के अनुसार पड़ोसी देश के साथ आर्थिक संबंधों का दायरा बढ़ाना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। अतीत में भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को लेकर कई बार चर्चाएं हो चुकी हैं लेकिन इस बार सरकार का फोकस पूरी तरह से व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने पर है। 300 अरब डॉलर के इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी तय करने के लिए भारतीय उद्योगों को अपनी गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालना होगा। आने वाले दिनों में सरकार उद्योग जगत से मिले सुझावों के आधार पर कुछ नए नीतिगत बदलावों की घोषणा भी कर सकती है। इस पूरी नीति का उद्देश्य देश के भीतर रोजगार के नए अवसर पैदा करना और कुल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करना है। आर्थिक मोर्चे पर चल रही इन तमाम गतिविधियों से देश के औद्योगिक जगत में एक नई उम्मीद और उत्साह का माहौल बनता हुआ दिखाई दे रहा है।