कोरोना काल के संकट से उभरा नया कारोबार
महामारी के दौर में रोजगार जाने के बाद भागलपुर निवासी स्वीटी के सामने जीवनयापन का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। इस विकट परिस्थिति से हार मानने के बजाय उन्होंने खुद का उद्यम शुरू करने का फैसला किया और अपने सामान के साथ सीधे ग्राहकों के दरवाजे तक पहुंचने लगीं। इस अनूठी पहल की शुरुआत में उनके पास बाजार की कोई खास समझ नहीं थी और ना ही ग्राहकों की पसंद का अनुभव था। घर-घर जाकर उत्पाद बेचने की इस प्रक्रिया ने उन्हें खरीदारों की वास्तविक जरूरतों से परिचित कराया और बाजार की मांग को गहराई से समझने का अवसर दिया। धीरे-धीरे उनके सामान की गुणवत्ता लोगों को पसंद आने लगी और बाजार में उनकी साख मजबूत होने लगी। इस प्रकार शुरुआती संघर्षों को पार करते हुए उन्होंने अपने छोटे से प्रयास को एक बड़े व्यवसाय में तब्दील कर दिया और अपने उद्यम को आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। आज उनका यह सफर अन्य लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुका है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते हैं। उनके इस अथक प्रयास ने साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची मेहनत से किसी भी मुश्किल हालात को बदला जा सकता है और अपनी मेहनत के बल पर एक नई पहचान बनाई जा सकती है।
विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर फैला ब्रांड
ग्राहकों के बीच लोकप्रियता मिलने के बाद स्वीटी ने अपने व्यवसाय का दायरा काफी तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने उत्पादों की सूची में शुद्ध सरसों के तेल के अलावा सत्तू, बेसन, कतरनी चूड़ा और चावल जैसी जरूरी खाद्य सामग्रियों को भी शामिल किया। अपने ब्रांड का नाम देसी होम रखा और इसे डिजिटल बाजार में स्थापित करने के लिए कई तरह के कानूनी दस्तावेज तैयार कराने पड़े। विभिन्न सरकारी और निजी कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद उन्हें बड़ी सफलता हाथ लगी। कड़े प्रयासों के परिणामस्वरुप उनके सामान अब ओएनडीसी माई स्टोर, अमेजन, जीईएम और एमएसएमई मार्ट जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर ग्राहकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो गए हैं। इसके अलावा उनकी यह इकाई भागलपुर की पहली एमएसएमई जेड गोल्ड प्रमाणित इकाई बनने का गौरव भी हासिल कर चुकी है। उनके द्वारा तैयार किए जा रहे इन उत्पादों की लगातार आपूर्ति पटना तथा मुजफ्फरपुर के खादी मॉल में भी की जा रही है। डिजिटल माध्यमों के जरिए उनके कारोबार की पहुंच केवल बिहार तक सीमित नहीं रही बल्कि इसका विस्तार हैदराबाद और आंध्र प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों तक भी हो चुका है जिससे उनके उद्यम को एक राष्ट्रीय पहचान मिल गई है।
सालाना बीस लाख का कारोबार और भविष्य की योजनाएं
अपने इस सफल उद्यम के माध्यम से स्वीटी वर्तमान समय में सालाना लगभग 20 लाख रुपये तक का कारोबार कर रही हैं। बाजार में उनके उत्पादों की लगातार बढ़ती हुई भारी मांग को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना यानी पीएमएफएमई योजना के तहत वित्तीय सहायता भी प्राप्त की है। इस आर्थिक मदद से उनके व्यवसाय को और अधिक मजबूती मिली है। वह अपने इस उद्यम को यहीं रोकने के मूड में नहीं हैं बल्कि भविष्य में इसका और भी बड़े पैमाने पर विस्तार करना चाहती हैं। उनका मुख्य लक्ष्य आने वाले समय में इस उद्योग के साथ लगभग 100 महिलाओं को जोड़कर उन्हें पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाना है। बड़े स्तर पर अपने सामान का उत्पादन करने के लिए वह बरारी क्षेत्र में स्थित बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी बियाडा परिसर में एक नई इकाई स्थापित करने की पूरी योजना पर काम कर रही हैं। इससे पहले उन्होंने वर्ल्ड फूड इंडिया-2025 के दौरान राजधानी दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी बातचीत भी की थी जो उनके जीवन की एक बड़ी उपलब्धि रही है। उनकी यह पूरी यात्रा दिखाती है कि किस प्रकार एक आम महिला अपनी मेहनत के बल पर बड़ा मुकाम हासिल कर सकती है।