विदेशी मांग से धान की कीमतों में भारी उछाल
किसानों को उनकी फसल का इस बार बहुत ही शानदार और लाभकारी मूल्य मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और घरेलू बाजार में चावल की भारी मांग बनी हुई है। इस समय सबसे अधिक मांग ईरान के बाजारों से आ रही है। ईरान में सभी किस्मों की कुल 12 लाख मीट्रिक टन की एक बड़ी बाजार पहुंच है। भारत से सबसे ज्यादा चावल का निर्यात मुख्य रूप से ईरान को ही किया जाता है। निर्यातकों का कहना है कि यह स्थिति किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। फसल की कटाई के दौरान प्रति एकड़ झाड़ भी काफी अच्छा निकल रहा है। सूखा और साफ होने के कारण किसानों का धान खुले बाजार में 4460 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक चुका है। प्रति एकड़ औसतन उत्पादन करीब 58 मण तक दर्ज किया गया है। किसानों को अपनी उपज का बेहतरीन रिटर्न मिल रहा है और वे अपनी आय से बहुत संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
विभिन्न चावल किस्मों के दाम और बंपर पैदावार
विदेशी और घरेलू बाजारों में इस वर्ष चावल की विभिन्न किस्मों के दाम आसमान छू रहे हैं। 1509 किस्म के स्टीम चावल का वर्तमान मूल्य बाजार में 8600 रुपये से लेकर 9000 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है। इसके अलावा सेला चावल का भाव भी 8400 रुपये प्रति क्विंटल के ऊंचे स्तर पर बिक रहा है। अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के कारण किसानों की प्रति एकड़ कमाई में जबरदस्त इजाफा हुआ है। प्रति एकड़ के हिसाब से लगभग एक लाख रुपये मूल्य का धान आसानी से बिक रहा है। यदि किसी किसान के पास तीन एकड़ जमीन है तो उसका कुल धान तीन लाख रुपये से अधिक कीमत पर निकला है। इस बार की फसल ने किसानों की किस्मत के दरवाजे खोल दिए हैं और उनके वारे न्यारे हो गए हैं। इतनी अधिक कीमतों के कारण कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है और किसान बहुत प्रसन्न हैं।
वर्ष 2015 की मंदी से वर्तमान बंपर मुनाफे तक का सफर
साल 2015 के दौरान प्रदेश में 1509 किस्म का उत्पादन बहुत अधिक मात्रा में हुआ था। उस समय इस किस्म के चावल की मांग बाजार में काफी कम थी। स्थिति यह थी कि इस किस्म को खरीदने वाला कोई भी प्रमुख खरीदार आगे नहीं आ रहा था। प्रदेश की मंडियों में अपनी धान की फसल की खरीद को लेकर किसानों और किसान यूनियनों ने बड़े स्तर पर धरने और प्रदर्शन किए थे। इसके बाद प्रदेश सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए 1509 किस्म को 1800 रुपये प्रति क्विंटल के निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा था। इसके पश्चात वर्ष 2020 में सरकार ने एक अहम नीतिगत फैसला लिया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि यदि 1509 का बाजार भाव पीआर किस्म से कम होगा तो इसे एमएसपी पर खरीदा जाएगा। उस कड़े संघर्ष के दिनों से लेकर आज अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण कीमतें 4400 रुपये क्विंटल तक पहुंचने का यह सफर कृषि इतिहास में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।