मंगलवार को शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत
मुंबई के वित्तीय बाजार में मंगलवार का दिन मंदी के साथ शुरू हुआ और निवेशकों को शुरुआती दौर में ही बड़ा झटका लगा। दुनियाभर के बाजारों से प्राप्त हुए नकारात्मक संकेतों के कारण भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों पर दबाव बना रहा। कारोबार के शुरुआती सत्र में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक 22700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे लुढ़क गया। वहीं दूसरी ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स भी भारी दबाव के बीच कारोबार करता हुआ दिखाई दिया। सुबह ठीक साढ़े नौ बजे के समय सेंसेक्स 506.29 अंकों की भारी गिरावट के साथ 0.70 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज करते हुए 72265.43 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। इसके अलावा निफ्टी में भी बड़ी सुस्ती देखने को मिली और यह 146.25 अंक यानी 0.64 प्रतिशत टूटकर 22634.00 के स्तर पर जा पहुंचा। बाजार खुलने के साथ ही बिकवाली का भारी दौर शुरू हो गया था जिससे शेयरों के दाम तेजी से नीचे आने लगे। कारोबार के इन शुरुआती पलों में ही बाजार का रुख पूरी तरह से बिकवाल हावी होने का संकेत दे रहा था और निवेशकों की घबराहट साफ महसूस की जा सकती थी।
विभिन्न सेक्टर्स में बिकवाली और कमजोर ब्रेड्थ
कारोबार के शुरुआती दौर में देश के कई प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया जिससे पूरे बाजार की धारणा पर बुरा असर पड़ा। ऑटोमोबाइल, मेटल और प्राइवेट बैंक सेक्टर के शेयरों में जोरदार कमजोरी दर्ज की गई जिससे सूचकांकों को ऊपर उठने का मौका नहीं मिला। निवेशकों ने बिना किसी देरी के विभिन्न उद्योगों के शेयरों में मुनाफावसूली या बिकवाली शुरू कर दी थी। इस चौतरफा बिकवाली के कारण पूरे बाजार की ब्रेड्थ बेहद कमजोर स्थिति में नजर आई और मंदी का दायरा काफी बड़ा हो गया था। शुरुआती कारोबार के दौरान देश भर के शेयर बाजारों में केवल 1,002 शेयरों में ही तेजी दर्ज की जा सकी थी। इसके विपरीत लगभग 2,016 शेयर ऐसे थे जो भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे और लाल निशान में थे। इसके अलावा मात्र 145 शेयरों के भाव में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं देखा गया और वे स्थिर बने रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों ने भारतीय बाजार की इस मंदी को और अधिक हवा दे दी जिससे छोटे और बड़े दोनों निवेशकों की चिंताएं काफी हद तक बढ़ गईं।
वैश्विक रुझान और भविष्य की दिशा पर नजर
बाजार के वरिष्ठ विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले आगामी सत्रों के दौरान शेयर बाजार की चाल पूरी तरह से वैश्विक रुझानों पर निर्भर करेगी। विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां और देश-विदेश के प्रमुख आर्थिक संकेतक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा तमाम निवेशक कंपनियों द्वारा घोषित किए जाने वाले तिमाही परिणामों और क्षेत्रवार प्रदर्शन पर भी अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। वैश्विक बाजारों की हर छोटी-बड़ी हलचल का सीधा असर घरेलू निवेशकों की मनोदशा पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों की राय में जब तक अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती और विदेशी निवेशकों का रुख सकारात्मक नहीं बनता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर यूं ही जारी रह सकता है। आम निवेशकों को भी सलाह दी जाती है कि वे बाजार के इन उतार-चढ़ाव भरे माहौल में सोच-समझकर ही अपने निवेश के फैसले लें।