कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में आई भारी गिरावट
अक्टूबर महीने के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रुख के साथ हुई थी। लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, दोपहर एक बजते-बजते दोनों प्रमुख सूचकांकों का हाल बेहद खराब हो गया और वे लगातार नीचे फिसलते चले गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का तीस शेयरों वाला सूचकांक यानी सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर बहत्तर हजार चार सौ अस्सी की तुलना में बेहतर बानवे पर खुला था। शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें कुछ देर तक मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया था। परंतु दोपहर के समय अचानक से बिकवाली का दौर काफी तेज हो गया और यह सूचकांक भरभराकर इकहत्तर हजार पाँच सौ सत्ताईस के स्तर पर आ गिरा। पिछले कारोबारी बंद की तुलना में इस सूचकांक में नौ सौ पचास अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के पचास शेयरों वाले सूचकांक निफ्टी का हाल भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। निफ्टी अपने पिछले बंद बाइस हजार छह सौ बीस की तुलना में गिरावट के साथ बाइस हजार पाँच सौ तितालीस पर ओपन हुआ था। इसके बाद यह भी सेंसेक्स के नक्शेकदम पर चलते हुए और अधिक फिसल गया तथा अंत में बाइस हजार तीन सौ एक के स्तर पर आ गया। इस प्रकार निफ्टी में भी तीन सौ उन्नीस अंकों की तगड़ी टूट दर्ज की गई। बाजार के अचानक इस तरह बेपटरी हो जाने से वित्तीय जगत में खलबली मच गई और निवेशकों को भारी भरकम नुकसान उठाना पड़ा।
विभिन्न सेक्टरों के शेयरों में भारी बिकवाली और नुकसान
शेयर बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच टाटा से लेकर महिंद्रा तक के तमाम दिग्गज शेयर ताश के पत्तों की तरह पूरी तरह बिखर गए। ऑटो सेक्टर के इंडेक्स में सबसे अधिक तबाही देखी गई और यह तीन प्रतिशत से भी ज्यादा टूट गया। बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में आने वाले कई बड़े शेयर बुरी तरह प्रभावित हुए। मारुति का शेयर चार दशमलव पैंतालीस प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर चार दशमलव पैंतीस प्रतिशत और टाटा स्टील का शेयर तीन दशमलव सत्तर प्रतिशत तक नीचे लुढ़क गया। इसके अलावा आईटीसी का शेयर दो दशमलव ९० प्रतिशत, अडानी पोर्ट्स का शेयर दो दशमलव चौहत्तर प्रतिशत और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का शेयर दो दशमलव सत्तर प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। इटरनल का शेयर दो दशमलव पचास प्रतिशत तथा हिंदुस्तान यूनिलीवर का शेयर दो दशमलव पैंतालीस प्रतिशत तक फिसल गया। मिडकैप सेगमेंट की बात करें तो पॉलिसी बाजार का शेयर साढ़े छह प्रतिशत, यूपीएल का शेयर चार दशमलव शून्य सात प्रतिशत, भारत फोर्ज का शेयर तीन प्रतिशत और एयू बैंक का शेयर दो दशमलव अस्सी प्रतिशत की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था। स्मॉलकैप श्रेणी के शेयरों का हाल भी इससे अलग नहीं था। इस कैटेगरी में संसेरा का शेयर छह दशमलव अस्सी प्रतिशत और वन सोर्स का शेयर साढ़े पाँच प्रतिशत की बड़ी गिरावट के घेरे में आ गया। इन सभी दिग्गज और चुनिंदा शेयरों में आई इस तेजि से बिकवाली ने पूरे बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया।
गिरावट के मुख्य कारण और बाजार का मौजूदा माहौल
घरेलू शेयर बाजार में अचानक आई इस भीषण गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ बिकवाली को सबसे मुख्य वजह माना जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी होने की वजह से विदेशी निवेशकों का यह रुख और अधिक आक्रामक हो गया है। बीते पाँच कारोबारी दिनों से लगातार भारतीय बाजार से विदेशी पूंजी बाहर निकलने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। केवल तीस सितंबर के एक ही दिन में लगभग दस हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का शुद्ध आउटफ्लो देखने को मिला, जिससे बाजार की नींव हिल गई। इसके अलावा विदेशी मोर्चे के साथ-साथ घरेलू मोर्चे पर भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने भी बाजार के माहौल को और ज्यादा बिगाड़ दिया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लुढ़ककर पचानवे दशमलव आठानवे के स्तर पर जा पहुँचा। इस पूरे घटनाक्रम के बीच शेयर बाजार में डर और जोखिम का पैमाना माने जाने वाला इंडिया विक्स करीब पाँच प्रतिशत की छलांग लगाकर चौदह दशमलव तेरह पर पहुँच गया। बाजार में मचे इस कोहराम के बाद विशेषज्ञों और जानकारों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे किसी भी तरह के नए निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से पूरी चर्चा अवश्य कर लें ताकि वे इस प्रकार के बड़े जोखिमों से खुद को सुरक्षित रख सकें।