ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव
कारोबार के दौरान निफ्टी अपने ऊपरी पायदान पर मजबूती के साथ टिकने में असफल रहा है। हावरली चार्ट पर बीस ईएमए यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के आसपास कड़ा प्रतिरोध मिलने के कारण अंतिम घंटों में बिकवाली हावी हो गई। इस वजह से सूचकांक में लगातार कमजोरी का दौर देखा गया और कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा। बाजार के जानकारों के अनुसार निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी बिकवाली बढ़ाई जिससे यह स्थिति पैदा हुई। सूचकांक को संभालने के लिए निचले स्तरों पर पर्याप्त खरीदारी का समर्थन नहीं मिल पाया। इसी कमजोरी के चलते आज कारोबार की शुरुआत सुस्त रहने की पूरी आशंका जताई जा रही है और बाजार के तमाम प्रमुख पैमानों पर दबाव साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। कारोबारियों को अपने सौदे संभालते समय इन तकनीकी रुकावटों का खास तौर पर ध्यान रखना होगा ताकि किसी भी बड़ी अनचाही वित्तीय हानि से समय रहते बचा जा सके।
अंतरराष्ट्रीय कारकों और बॉन्ड यील्ड का असर
घरेलू बाजार में आई इस सुस्ती के पीछे वैश्विक स्तर के कई अहम कारण जिम्मेदार रहे हैं। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अचानक आया उछाल और अमेरिकी दस वर्षीय बॉन्ड यील्ड में हुई बढ़ोतरी ने बाजार को नीचे गिराने में अपनी बेहद अहम भूमिका निभाई। इन दोनों बाहरी आर्थिक घटकों की वजह से वैश्विक निवेशकों की धारणा पर सीधा असर पड़ा। चॉइस एलकेपी सिक्योरिटीज के रूपक डे ने इस संबंध में अपनी विशेष राय साझा करते हुए बताया है कि निफ्टी के चार्ट पर लगातार दो रिवर्सल पैटर्न यानी हैमर के बाद इनवर्टेड हैमर बन चुके हैं। इसके बावजूद पूरे बाजार का समग्र सेंटिमेंट अभी भी कमजोर बना हुआ है और किसी भी बड़ी तेजी के लिए मजबूत संकेतों का अभाव है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार से कोई सकारात्मक और मजबूत संकेत नहीं मिलते तब तक घरेलू सूचकांकों में एकतरफा बड़ी चाल देखने की उम्मीद बेहद कम है और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
आगे की चाल तय करने वाला अहम स्तर
आने वाले सत्रों के लिए सूचकांक की दिशा तय करने में एक खास पायदान बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञ रूपक डे के अनुसार आने वाले समय के लिए सूचकांक पर बाईस हजार छह सौ का स्तर काफी ज्यादा अहम और निर्णायक रहने वाला है। यदि बाजार इस तयशुदा स्तर से नीचे फिसलता है तो निवेशकों को बाजार में काफी तेज गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, जब तक निफ्टी इस महत्वपूर्ण सीमा के ऊपर पूरी तरह टिका रहता है, तब तक बाजार में रिकवरी आने की उम्मीद पूरी तरह बनी रहेगी। ऐसी स्थिति में जानकारों की सलाह है कि हर एक मूवमेंट पर पैनी नजर रखी जानी चाहिए ताकि समय रहते सही फैसले लिए जा सकें। मध्यम और लघु अवधि के निवेशकों को अपनी रणनीति इसी विशेष सीमा को ध्यान में रखकर बनानी होगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस स्तर के टूटने या टिकने से ही आगामी दिनों की दिशा तय होगी और उसी के अनुसार निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल करने का मौका मिलेगा।