सेंसेक्स और निफ्टी की इंट्रा-डे चाल
भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह से ही भारी दबाव की स्थिति बनी हुई है। सुबह 9:40 बजे सेंसेक्स 339.85 अंक यानी 0.47 प्रतिशत गिरकर 72,298.85 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी समय निफ्टी 50 सूचकांक 113.05 अंक या 0.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,490.00 के स्तर तक नीचे आ गया। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स ने 384.47 अंकों की गिरावट के साथ 72,254.23 का निचला स्तर छुआ था। वहीं निफ्टी भी फिसलकर 22,475.75 के स्तर तक पहुंच गया था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी आधे फीसदी से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई है। बाजार में इस बिकवाली का बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का लगातार नौवें दिन शेयर बेचना है। बुधवार को एफआईआई ने 6,121.37 करोड़ रुपये के शेयर नेट आधार पर बेचे। आज बाजार में डेरिवेटिव्स सेगमेंट की साप्ताहिक एक्सपायरी का भी असर दिखाई दे रहा है, जिससे उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।
आरबीआई का फैसला और आर्थिक चुनौतियां
भारतीय रिजर्व बैंक ने लंबे अंतराल के बाद रेपो दर को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का सीधा असर ऑटो, मेटल और रियल्टी क्षेत्रों पर पड़ा है, जो लगातार दूसरे दिन भी दबाव में रहे। मेटल और रियल्टी इंडेक्स में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि ऑटो सेक्टर में भी आधे फीसदी से ज्यादा की कमजोरी देखी गई। इसके अतिरिक्त बैंकिंग और फार्मा शेयरों में भी बिकवाली का रुझान है। हालांकि, आईटी सेक्टर में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली। आरबीआई ने अपनी मौद्रिक समीक्षा में आर्थिक विकास दर के अनुमानों के साथ-साथ मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर के अनुमानों को भी बढ़ा दिया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का लक्ष्य 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। महंगाई के बढ़ते दबाव के पीछे कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थितियां और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता को जिम्मेदार माना जा रहा है।
वैश्विक तनाव और बाजार का भविष्य
घरेलू बाजार पर दबाव का एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। खाड़ी देशों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री जहाजों पर बढ़ते हमलों के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इस डर से ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर पड़ा है। इसके अलावा, अमेरिका में लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि ने वैश्विक स्तर पर निवेशकों को सतर्क कर दिया है। बाजार विशेषज्ञ पोनमुडी आर के अनुसार, जब तक विदेशी निवेशकों का निवेश स्थिर नहीं होता और ट्रेजरी यील्ड कम नहीं होती, तब तक बिकवाली का जोखिम बना रहेगा। तकनीकी तौर पर निफ्टी के लिए 22,500 का स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में है, जबकि 22,800 के ऊपर टिकने पर ही रिकवरी की संभावना बन सकती है। महंगाई और बढ़ते कर्ज के चिंताओं के बीच निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है।