आठ सप्ताह की गिरावट पर ब्रेक के संकेत
भारतीय शेयर बाजार में बीते करीब दो महीनों से जारी बिकवाली का सिलसिला अब थमने की स्थिति में दिखाई दे रहा है। पिछले आठ हफ्तों के दौरान लगातार गिरावट ने निवेशकों को काफी परेशान किया है और बाजार का माहौल काफी नकारात्मक रहा है। पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। बम्बई शेयर बाजार का सेंसेक्स सूचकांक 570.59 अंक की गिरावट के साथ 71,909.70 पर बंद हुआ था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स 198.50 अंक टूटकर 22,421.95 के स्तर पर आ गया था। पिछले 25 वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर है जब भारतीय बाजार लगातार आठ सप्ताह तक गिरावट के चक्र में फंसा रहा है। इस पूरी अवधि में निफ्टी करीब 9 फीसदी तक लुढ़क चुका है। हालांकि, सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आ रहे सकारात्मक रुझान भारतीय निवेशकों के लिए राहत लेकर आए हैं।
वैश्विक बाजारों का सकारात्मक रुख
सोमवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत से पहले विदेशी बाजारों से भारतीय सूचकांकों के लिए अच्छे संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका के शेयर बाजार पिछले सप्ताह तेजी के साथ बंद हुए थे, जिसका असर अब एशियाई बाजारों पर भी स्पष्ट दिख रहा है। जापान का निक्केई सूचकांक करीब 1800 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी हरे निशान में है। सीएसी और एफएसई-100 जैसे अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स भी तेजी के साथ कारोबार करते देखे गए हैं। भारतीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक माने जाने वाले गिफ्ट निफ्टी ने भी आज उछाल दिखाया है और यह 114 अंक चढ़कर 22,604 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। कच्चे तेल की कीमतों में भी कुछ राहत देखने को मिली है, हालांकि ब्रेंट क्रूड अभी भी 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जो पिछले बंद भाव से करीब 1 फीसदी की गिरावट है।
बाजार दबाव के मुख्य कारण और सलाह
शेयर बाजार में पिछले लंबे समय से जारी दबाव के पीछे मुख्य रूप से विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी अस्थिरता ने बाजार की धारणा को काफी नुकसान पहुंचाया है। निवेशकों को पिछले कुछ हफ्तों में भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिससे बाजार का मूड काफी खराब हो गया है। हालांकि सोमवार को वैश्विक संकेतों में आए सुधार से बाजार में एक नई उम्मीद जगी है कि गिरावट का लंबा दौर समाप्त हो सकता है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है और बाजार की चाल में अनिश्चितता बनी रहती है। किसी भी तरह के निवेश निर्णय लेने से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय विशेषज्ञों से परामर्श जरूर करना चाहिए ताकि वे अपनी पूंजी को सुरक्षित रख सकें और बाजार की अस्थिरता से होने वाले नुकसान से बच सकें।