सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल
भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 15 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत से ही तेजी का माहौल बना हुआ है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 850 अंक यानी 1.17 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी के साथ 73,600 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसके साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी निवेशकों की लिवाली के चलते 250 अंक यानी 1.07 प्रतिशत की बढ़त हासिल कर चुका है। इस जोरदार बढ़त के साथ निफ्टी 22,850 के आंकड़े को पार कर गया है। बाजार के इन दोनों प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी से निवेशकों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही है। कारोबार के दौरान बाजार में विभिन्न सेक्टरों के शेयरों की चाल में अलग-अलग रुख देखने को मिल रहा है। मुख्य सूचकांकों के इस तरह ऊपर जाने से बाजार का कुल रुझान काफी सकारात्मक बना हुआ है और विश्लेषक भी इस स्थिति पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए हैं।
आईटी शेयरों में खरीदारी और बैंकों में बिकवाली
कारोबार के दौरान आज बाजार में चुनिंदा सेक्टरों के शेयरों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर और फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स यानी एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों द्वारा जमकर खरीदारी की जा रही है। इन दोनों सेक्टरों में लिवाली बढ़ने से सूचकांक को ऊपर जाने में काफी मदद मिली है। इसके विपरीत सरकारी बैंकों के शेयरों में आज बिकवाली का दबाव साफ तौर पर नजर आ रहा है। सरकारी बैंकों के शेयरों में निवेशक अपनी बिकवाली कर रहे हैं जिससे वहां थोड़ी नरमी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों की बात करें तो उन्होंने पिछले सात दिनों के दौरान कुल 8 हजार करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली की है। बाजार के ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि घरेलू स्तर पर चुनिंदा खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों का रुख अभी भी बिकवाली की तरफ ही बना हुआ है और वे लगातार अपने निवेश को निकाल रहे हैं।
कच्चे तेल के दामों में गिरावट का असर
शेयर बाजार में आई इस अचानक तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 1.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इसके अलावा ब्रेंट क्रूड ऑयल भी 1.63 प्रतिशत लुढ़ककर 104 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल के दाम कम होने से देश का कुल आयात बिल काफी हद तक कम हो जाएगा जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी। इससे पहले अमेरिकी शेयर बाजार में 14 अक्टूबर को गिरावट का रुख रहा था। इन तमाम वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के बीच कच्चे तेल की सस्ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में सामने आई हैं और इसी के चलते घरेलू शेयर बाजार में आज यह उत्साहजनक तेजी देखने को मिल रही है।