एसएंडपी 500 सूचकांक में आई भारी गिरावट
अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक एसएंडपी 500 में रातों-रात एक बड़ी मंदी दर्ज की गई है। इस अचानक आई गिरावट के कारण वैश्विक निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। शेयर बाजार के जानकारों और विश्लेषकों के अनुसार इस तरह के तीव्र उतार-चढ़ाव से अर्थव्यवस्था की सेहत पर सीधा असर पड़ता है। एसएंडपी 500 दुनिया भर के उन सूचकांकों में शामिल है जिसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार की नब्ज माना जाता है। इस सूचकांक में अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ने से सूचकांक के स्तर पर भारी दबाव देखा गया। अमेरिका के इस बड़े शेयर बाजार में आई इस मंदी के तार वैश्विक आर्थिक संकेतों और नीतिगत बदलावों से जोड़े जा रहे हैं। बाजार के कारोबारियों के लिए यह स्थिति काफी अप्रत्याशित और चुनौतीपूर्ण साबित हुई है। इस पूरी घटना के बाद से ही वैश्विक स्तर पर वित्तीय विश्लेषक लगातार आंकड़ों का आकलन करने में जुट गए हैं ताकि इस मंदी के सटीक कारणों और प्रभावों का सही अनुमान लगाया जा सके। अमेरिका से शुरू हुई इस सुस्ती ने देखते ही देखते दुनिया भर के अन्य बड़े बाजारों को भी अपनी चपेट में ले लिया है जिससे हर तरफ सतर्कता बरती जा रही है।
एशियाई बाजारों में मचा हाहाकार और उथल-पुथल
अमेरिकी बाजार की इस बड़ी गिरावट का असर तुरंत ही एशियाई शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला है। एशियाई बाजारों में कारोबार की शुरुआत के साथ ही जबरदस्त हाहाकार मच गया। प्रमुख एशियाई सूचकांकों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया और निवेशकों ने अपने शेयरों को बेचना शुरू कर दिया। इस माहौल के बीच एशियाई क्षेत्र के तमाम छोटे और बड़े निवेशकों के चेहरे पर चिंता साफ तौर पर दिखाई दी। बाजार के जानकारों का मानना है कि जब वैश्विक स्तर पर बड़े सूचकांक गिरते हैं तो उसका मनोवैज्ञानिक असर तुरंत एशियाई बाजारों पर पड़ता है। इस दौरान शेयरों के भाव में तेजी से गिरावट दर्ज की गई और ट्रेडिंग फ्लोर पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के जानकारों का कहना है कि इस तरह की वैश्विक घटनाओं से स्थानीय मुद्रा और व्यापारिक गतिविधियों पर भी विपरीत असर पड़ने की पूरी संभावना रहती है। तमाम एशियाई देशों के स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार के दौरान भारी उतार-पुथल दर्ज की गई। इस अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों ने जोखिम भरे शेयरों से दूर रहने का ही फैसला किया जिससे बाजार में और अधिक दबाव देखने को मिला। हर तरफ केवल बिकवाली का जोर रहा और किसी भी बड़े शेयर में राहत की उम्मीद नहीं दिखाई दी।
सोने और चांदी के दामों में भी आई भारी कमजोरी
शेयर बाजारों में मची इस भारी तहलका और उथल-पुथल का सीधा असर कीमती धातुओं के बाजार पर भी पड़ा है। सोने और चांदी के दाम भी रातों-रात लुढ़क गए हैं जिससे सर्राफा बाजार में भी खलबली मच गई है। आमतौर पर आर्थिक संकट या शेयर बाजार की गिरावट के समय निवेशक सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हैं। लेकिन इस बार शेयर बाजारों की मंदी के साथ-साथ सोने और चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सर्राफा बाजार के जानकारों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर नकदी की भारी जरूरत होती है तब निवेशक अपनी हर संपत्ति को बेचकर नकदी जुटाने लगते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत सोने और चांदी के दामों में भी यह कमजोरी देखने को मिली है। कीमती धातुओं के भाव टूटने से उन लोगों को भी झटका लगा है जिन्होंने इनमें सुरक्षित निवेश के तौर पर पैसे लगा रखे थे। बाजार की इस व्यापक गिरावट ने यह साबित कर दिया है कि मौजूदा समय में वित्तीय बाजार कितने संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। निवेशक अब बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं और आने वाले दिनों में बाजार की चाल कैसी रहेगी इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस पूरी स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाले छोटे से बदलाव का असर हर वर्ग के बाजार पर कितनी तेजी से पड़ता है।