दक्षिण कोरियाई बाजार में भारी बिकवाली
सोमवार, 12 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया का प्रमुख शेयर सूचकांक कोस्पी 1.08 प्रतिशत नीचे लुढ़क गया। बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से सरकारी बॉन्ड मार्केट के प्रति निवेशकों का नकारात्मक दृष्टिकोण रहा। जानकारों की मानें तो सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद अस्थिरता कम नहीं हो रही है, जिससे ब्याज दरों में और अधिक बढ़ोतरी की प्रबल संभावना है। ताइवान का स्टॉक मार्केट भी 0.79 प्रतिशत गिरकर 49,016.77 के स्तर पर आ गया। वहीं जापान का निक्केई सूचकांक 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 69,030.92 के आसपास स्थिर रहा, जबकि जापान में स्पोर्ट्स डे के राष्ट्रीय अवकाश के कारण बाजार बंद थे। इस बीच हैंगसेंग इंडेक्स में 0.78 प्रतिशत की बढ़त दिखी और यह 24,398.00 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। स्ट्रेट टाइम्स इंडेक्स में भी 0.49 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। निवेशकों की चिंताएं केवल स्थानीय आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा के बढ़ते जोखिमों ने भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा कर दिए हैं।
हूती हमलों और ऊर्जा आपूर्ति का संकट
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों ने पूरे एशियाई बाजार के माहौल को खराब कर दिया है। रविवार को इस समूह ने सऊदी अरब के मुख्य हवाई अड्डे को निशाना बनाया, जबकि ठीक एक दिन पहले हुए हमले में 12 लोगों की जान गई थी। विश्लेषकों का मानना है कि इस तनाव के बढ़ने से एक बड़े संघर्ष की आशंका पैदा हो गई है, जिसमें अमेरिका के शामिल होने का खतरा है। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति बाधित हो सकती है। इन हमलों के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें शुरुआत में 0.7 प्रतिशत बढ़कर 105.45 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, लेकिन बाद में इनमें उतार-चढ़ाव देखा गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 0.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 92.27 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक टैंकर पर हुए हमले ने भी तेल की कीमतों को सहारा दिया है। सऊदी अरब अब बाब अल-मंडेब के पास जवाबी कार्रवाई का समर्थन कर रहा है, जो शिपिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और यह स्थिति वैश्विक बाजार के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गई है।
ब्याज दरों और महंगाई पर निवेशकों की नजर
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के संकेत और वहां के बॉन्ड यील्ड में हो रही वृद्धि भी वैश्विक निवेशकों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है। पिछले सप्ताह 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 5.4 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई थी, जो साल 2002 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। ऐसी स्थिति में बाजार इस बात का कयास लगा रहा है कि अगले छह महीनों के भीतर बैंक ऑफ कोरिया अपनी ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट्स तक का इजाफा कर सकता है। निवेशकों का मानना है कि ऊंची यील्ड उधार लेने की लागत को बढ़ाकर केंद्रीय बैंकों के काम को और कठिन बना रही है। अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का संभावित बयान अब बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि सितंबर के आंकड़े मजबूत रहते हैं, तो फेडरल रिजर्व को और अधिक कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल अमेरिकी डॉलर मुख्य मुद्राओं के मुकाबले लगातार चौथे सप्ताह बढ़त के साथ स्थिर बना हुआ है, जो वर्ष 2025 की शुरुआत के बाद से डॉलर का सबसे लंबा मजबूती का दौर है।