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नियामकीय विवाद: एफएसएसएआई के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची रेड बुल, एनर्जी ड्रिंक लेबल पर रोक का मामला

एनर्जी ड्रिंक निर्माता रेड बुल ने खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के उस निर्देश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है जिसमें कैफीन युक्त पेय पदार्थों पर 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द लिखने पर पाबंदी लगाई गई है। कंपनी का कहना है कि यह आदेश बिना पूर्व सूचना के जारी किया गया है।

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Ankit Yadav
30 सित 2026, 11:52
नियामकीय विवाद: एफएसएसएआई के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची रेड बुल, एनर्जी ड्रिंक लेबल पर रोक का मामला

दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल

रेड बुल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करते हुए खाद्य सुरक्षा नियामक द्वारा जारी सर्कुलर को रद्द करने की मांग की है। कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उत्पाद को दुनिया भर में इसी श्रेणी के तहत विपणन किया जाता है। प्राधिकरण के अचानक लिए गए निर्णय से बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है और इससे कंपनी की पूर्व नियोजित व्यावसायिक गतिविधियों को गहरा नुकसान पहुंचा है।

एफएसएसएआई के स्वास्थ्य संबंधी तर्क

दूसरी ओर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण का पक्ष रखते हुए वकीलों ने कहा कि कैफीन की अत्यधिक मात्रा वाले पेय पदार्थों को केवल ऊर्जा देने वाला बताकर बेचना उपभोक्ताओं विशेषकर युवाओं और बच्चों को भ्रमित करता है। नियामक का मानना है कि उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों के संघटकों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में पारदर्शी और स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। प्राधिकरण ने इन पेय पदार्थों को कैफीनेटेड बेवरेज के रूप में वर्गीकृत करने की सिफारिश की थी।

न्यायालय का रुख और अगली सुनवाई

अदालत ने दोनों पक्षों की शुरुआती दलीलें सुनने के बाद नियामक को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और कॉर्पोरेट निवेश के संतुलन की समीक्षा करने के बाद ही कोई अंतरिम राहत दी जाएगी। पेय उद्योग से जुड़ी अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी इस कानूनी मुकदमे के परिणाम पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

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