अमेरिका की नौकरी छोड़ भारत में रखी स्टार्टअप की नींव
साल 2016 के दौरान आशीष शाह के घर में एक नए मेहमान यानी उनके पहले बच्चे के आगमन की तैयारियां चल रही थीं। उस समय उनके भाई अतीश शाह अमेरिका में रह रहे थे और वे भारत के लिए बेबी प्रोडक्ट्स की तलाश करने में जुटे हुए थे। खोजबीन करने के दौरान उन्हें इस बात का कड़वा अहसास हुआ कि यह खास सेक्टर देश में पूरी तरह से असंगठित स्थिति में है। बाजार के भीतर छोटे से छोटे सामान के लिए भी अच्छे विकल्पों की भारी किल्लत महसूस की जा रही थी। इसी व्यक्तिगत निराशा और चारों तरफ फैले हुए खालीपन के माहौल ने उन्हें एक नया और क्रांतिकारी विचार दे दिया। इस नए आइडिया पर गहराई से विचार करने के बाद दोनों भाइयों ने अमेरिका में अपनी सुरक्षित और आरामदायक नौकरियों को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। इसके बाद उन दोनों ने मिलकर साल 2018 में अपने खुद के नए स्टार्टअप की आधारशिला रखी। शुरुआत में उनके सामने कई तरह की मुश्किलें आईं लेकिन दोनों भाइयों ने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य की तरफ लगातार आगे बढ़ते रहे।
बेबी प्रोडक्ट्स बाजार की भारी कमी और अतीश शाह का बयान
स्टार्टअप की शुरुआत करने के बाद अतीश शाह ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने शुरुआती अनुभवों को खुलकर साझा किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका में रहने के दौरान उनके पास खरीदारी के लिए यकीनन बहुत ज्यादा और बेहतर विकल्प उपलब्ध थे। लेकिन जब वे दोनों आपस में चर्चा करते थे तो उनके मन में यह बड़ा सवाल उठता था कि भारत में बुनियादी प्रोडक्ट्स को ढूंढना इतना ज्यादा मुश्किल क्यों बना हुआ है। इसी गंभीर समस्या पर विचार करने के बाद उन्होंने अपनी मुख्य तलाश अमेरिका के बजाय भारत के घरेलू बाजार में ही शुरू करने का पक्का फैसला किया। जब उन्होंने देश के भीतर गहराई से पड़ताल की तो उन्होंने पाया कि बच्चों के सामान से जुड़ा यह पूरा सेक्टर देश के अंदर पूरी तरह से असंगठित है। इसी बड़ी कमी को उन्होंने अपने लिए एक बड़ा अवसर माना और भाई के साथ मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाए। दोनों भाइयों ने मिलकर अपनी मेहनत के बल पर इस असंगठित क्षेत्र को एक व्यवस्थित रूप देने की ठानी। उन्होंने अपने काम को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ आगे बढ़ाया जिसके परिणामस्वरूप आज उनका यह कारोबार काफी तेजी से फलफूल रहा है।
25 करोड़ रुपये की कंपनी के मालिक बनने का पूरा सफर
एक व्यक्तिगत जरूरत और पारिवारिक आवश्यकता से शुरू हुआ यह सफर आज एक बड़ी सफलता की मिसाल बन चुका है। साल 2016 की उस खोज से लेकर साल 2018 में कंपनी की औपचारिक शुरुआत तक का रास्ता बिल्कुल भी आसान नहीं था। अमेरिका में अपने अच्छे खासे करियर को बीच में ही छोड़कर देश लौटने का फैसला इन दोनों भाइयों के लिए बहुत बड़ा जोखिम भरा कदम था। लेकिन उनकी यह सोची समझी दूरदर्शिता आज रंग लाई है और उनका यह स्टार्टअप करोड़ों का कारोबार बन गया है। वर्तमान समय में वे 25 करोड़ रुपये की विशाल कंपनी के मालिक के रूप में अपनी एक मजबूत पहचान बना चुके हैं। उनके इस प्रेरणादायक सफर से देश के उन तमाम युवाओं को एक नया रास्ता मिलता है जो नौकरी छोड़कर खुद का कुछ बड़ा करना चाहते हैं। बाजार की एक सामान्य सी समस्या को पहचानकर उसका समाधान ढूंढने की इस कला ने ही इन दोनों भाइयों को आज इस मुकाम पर ला खड़ा किया है। आने वाले समय में उनका यह कारोबार देश के स्टार्टअप जगत में एक बड़ी मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।