कारोबार की कमजोर शुरुआत और शुरुआती आंकड़े
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 7 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का तीस शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स एक सौ दो अंकों के नुकसान के साथ बहत्तर हजार नौ सौ छप्पन के स्तर पर खुला था। इसके अलावा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का पचास शेयरों वाला पैमाना निफ्टी पचासी अंकों की कमजोरी के साथ बाईस हजार छियानब्बे के स्तर पर कारोबार की शुरुआत करने में सफल रहा। कारोबार के शुरुआती दौर में ही बाजार का पूरा मूड काफी उखड़ा हुआ दिखाई दिया। सेंसेक्स चार सौ उचालीस अंकों की भारी गिरावट के साथ बहत्तर हजार छः सौ अट्ठाईस के स्तर पर आ गया था। इसी तरह निफ्टी भी एक सौ पैंसठ अंकों के नुकसान के साथ बाईस हजार छः सौ दस के स्तर पर कारोबार कर रहा था। उस समय सेंसेक्स के तीस शेयरों में से केवल एयरटेल और टेक महिंद्रा ही ऐसे दो शेयर थे जो हरे निशान के दायरे में बने हुए थे। गिफ्ट निफ्टी ने भी कारोबार शुरू होने से पहले ही सूचकांकों के नकारात्मक दायरे में खुलने के स्पष्ट संकेत दे दिए थे। एशियाई बाजारों में भी लगातार जारी बढ़त का सिलसिला टूट चुका था और निवेशकों ने निचले स्तरों से ही अपने कारोबार की शुरुआत की थी।
आरबीआई की मौद्रिक नीति और बाजार का रिएक्शन
भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से अपनी नई मौद्रिक नीति का आधिकारिक ऐलान बुधवार को सुबह दस बजकर पंद्रह मिनट पर कर दिया गया। केंद्रीय बैंक ने अपने रेपो रेट में पच्चीस बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करने का बड़ा निर्णय लिया। इस अहम मौद्रिक नीतिगत अपडेट के तुरंत बाद शेयर बाजार में अचानक से रिकवरी की प्रक्रिया शुरू हो गई। आरबीआई के इस बड़े ऐलान से पहले सेंसेक्स लुढ़ककर बहत्तर हजार पांच सौ बीस के निचले स्तर तक पहुंच चुका था। नीतिगत घोषणा आने के बाद सेंसेक्स में कुछ सुधार दर्ज हुआ और यह दो सौ उन्सठ अंक नीचे बहत्तर हजार सात सौ सत्तावे के स्तर पर आ गया। इसी तरह निफ्टी भी भारतीय रिजर्व बैंक के ऐलान से पहले बाईस हजार पांच सौ अठहत्तर के निचले स्तर को छू चुका था। बाद में गिरावट का दायरा थोड़ा कम होने के बाद निफ्टी अट्ठानवे अंकों के नुकसान के साथ बाईस हजार छः सौ छिहत्तर के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया। एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने इस स्थिति पर अपनी विशेष प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बताया कि भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी के साथ खुलने की मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का लगातार ऊंचा रहना और आरबीआई की पॉलिसी के फैसले से पहले बनी सतर्कता रही।
पिछला सत्र और वैश्विक बाजारों की स्थिति
बुधवार को बाजार में आई कमजोरी से ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में बहुत अच्छी तेजी दर्ज की गई थी। यह लगातार दूसरा ऐसा कारोबारी दिन था जब बाजार में मजबूती का रुख बना रहा। कच्चे तेल की कीमतें सौ डॉलर प्रति बैरल के अहम आंकड़े से नीचे आ चुकी थीं। बैंकिंग सेक्टर के तमाम शेयरों में तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज के काउंटर पर जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी जिससे निवेशकों का भरोसा काफी हद तक मजबूत हुआ था। इसके परिणाम स्वरूप मंगलवार को सेंसेक्स छह सौ पचासी यानी शून्य दशमलव नौ पांच प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ तिहत्तर हजार सड़सठ के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं दूसरी तरफ निफ्टी ने भी दो सौ बीस अंकों यानी शून्य दशमलव नौ आठ प्रतिशत की मजबूती दर्ज करते हुए बाईस हजार सात सौ छत्तर के स्तर पर अपना कारोबार समाप्त किया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी बाजार मंगलवार, छह अक्टूबर को मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए थे। एस एंड पी पांच सौ सूचकांक अगस्त महीने के बाद पहली बार अपने नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने में कामयाब रहा था। नैस्डैक कंपोजिट ने भी पिछले रिकॉर्ड को पार करते हुए लगातार नए शिखर छूने का सिलसिला बखूबी जारी रखा था। डॉऊ जोन्स दो सौ त्रेपन अंकों यानी शून्य दशमलव चार नौ प्रतिशत की बढ़त के साथ इक्यावन हजार पांच सौ इक्कीस के स्तर पर बंद हुआ था। जापान का निक्केई बाईस सौ सूचकांक लगभग सपाट खुला था जबकि टॉपिक्स इंडेक्स में शून्य दशमलव एक आठ प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई थी। दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में टेक्नोलॉजी शेयरों की कमजोरी के कारण एक सौ ग्यारह प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई थी।