सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार के दौरान भारी बिकवाली का भारी दबाव देखा गया जिसके परिणामस्वरूप प्रमुख सूचकांक काफी नीचे फिसल गए। बंबई शेयर बाजार का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 571 अंकों की भारी गिरावट के साथ 71,910 के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी 198 अंकों की बड़ी कमजोरी दर्ज करते हुए 22,422 के स्तर पर आ गया। बाजार खुलने के बाद से ही निवेशकों में बिकवाली का माहौल बना रहा और दिन भर के कारोबार के दौरान निचले स्तरों पर लगातार दबाव देखा गया। दोनों ही प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी दर्ज की गई है। बाजार के जानकारों के अनुसार निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली और वैश्विक स्तर पर मिले कमजोर संकेतों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। कारोबार की समाप्ति पर बाजार के अधिकांश sectoral indices भी लाल निशान में ही बंद हुए जिससे पूरे बाजार में मायूसी का माहौल साफ तौर पर दिखाई दिया।
लगातार आठ हफ्तों की मंदी
बाजार के इतिहास में पिछले 25 वर्षों के दौरान यह एक बेहद दुर्लभ और चिंताजनक दौर दर्ज किया गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी सूचकांक ने पिछले पच्चीस सालों में पहली बार लगातार आठ हफ्तों तक नेगेटिव क्लोजिंग का सामना किया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से हर हफ्ते के अंत में निफ्टी पिछले हफ्ते के मुकाबले नुकसान के साथ ही बंद होता आया है। साप्ताहिक आधार पर इस प्रकार की लगातार मंदी का रुख शेयर बाजार की कमजोरी और निवेशकों के गहरे अविश्वास को दर्शाता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की लंबी मंदी का सिलसिला बहुत ही कम देखने को मिलता है। इस लगातार आठ हफ्तों की गिरावट ने तकनीकी विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है क्योंकि बाजार किसी भी स्तर पर मजबूत टिकने में असफल रहा है। हर बार जब बाजार संभलने की कोशिश करता है, तो ऊपरी स्तरों से फिर से भारी बिकवाली शुरू हो जाती है और सूचकांक नीचे आ जाते हैं। लगातार आ रही इन साप्ताहिक गिरावटों की वजह से खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो को भी बड़ा झटका लगा है और वे बाजार में नई पूंजी लगाने से बच रहे हैं।
बाजार की पृष्ठभूमि और असर
शेयर बाजार की इस प्रकार की उथल-पुथल का सीधा असर आम निवेशकों की बचत और म्यूचुअल फंड निवेश पर पड़ता है। जब सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक भारी अंकों में टूटते हैं, तो पूरी अर्थव्यवस्था के सेंटिमेंट पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐतिहासिक रूप से भारतीय शेयर बाजार समय-समय पर वैश्विक आर्थिक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू कारकों के कारण ऐसे उतार-चढ़ाव देखता रहा है। पिछले पच्चीस वर्षों में कई बार आर्थिक संकट और मंदी के दौर आए हैं, लेकिन लगातार आठ हफ्तों की साप्ताहिक गिरावट का यह नया कीर्तिमान बाजार की वर्तमान कमजोरी को उजागर करता है। बाजार के जानकारों का सुझाव है कि ऐसी स्थितियों में निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए और सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय जोखिम प्रबंधन और अपने पोर्टफोलियो की नए सिरे से समीक्षा करने का होता है। नियामक संस्थाएं और बाजार विशेषज्ञ इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि आने वाले हफ्तों में बाजार इस नकारात्मक चक्र को तोड़कर कब तक वापसी करने में सफल हो पाता है।