सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट इस खबर के मुताबिक, 2026-09-24 के दिन भारतीय वित्तीय बाजारों में भारी उथल-पुथल का सामना करना पड़ा। कारोबार की शुरुआत के साथ ही बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक धड़ाम हो गए। बंबई स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1,200 से अधिक अंकों की भारी-भरकम गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी कमजोरी के दौर से गुजरते हुए 23,100 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। इस अचानक आई गिरावट ने बाजार के तमाम दिग्गजों और खुदरा निवेशकों को हैरान कर दिया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की अचानक बिकवाली से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आती है और मचुअर्ड फंड तथा पोर्टफोलियो पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इस भारी भरकम गिरावट के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और कई प्रमुख शेयरों में लोअर सर्किट तक लग गए।
गिरावट के पीछे पांच प्रमुख कारण बाजार जानकारों के अनुसार इस बड़ी मंदी के पीछे कुल पांच मुख्य वजहें जिम्मेदार मानी जा रही हैं। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और घरेलू मोर्चे पर उपजे दबाव ने इस गिरावट को और गहरा कर दिया है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट जगत के तिमाही नतीजों को लेकर अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के मोर्चे पर बढ़ती चिंताओं ने भी निवेशकों का मनोबल तोड़ा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक सुस्ती या ब्याज दरों को लेकर असमंजस की स्थिति बनती है, तो भारतीय बाजार पर उसका सीधा असर देखने को मिलता है। इस विशेष दिन पर भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाला, जिससे बिकवाली का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। तकनीकी संकेतकों के लिहाज से भी बाजार पहले से ही दबाव में था और ऐसे में किसी भी नकारात्मक खबर ने सूचकांकों को नीचे धकेलने का काम किया। बैंक, ऑटो और आईटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली दर्ज की गई, जिसके कारण पूरे बाजार का सेंटिमेंट बेहद कमजोर हो गया।
निवेशकों पर असर और आगे की स्थिति बाजार में आई इस भारी गिरावट के बाद देश भर के खुदरा और संस्थागत निवेशकों में गहरी चिंता फैल गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव आर्थिक चक्र का हिस्सा होते हैं, लेकिन इतनी बड़ी गिरावट से निवेशकों का भरोसा क्षणिक रूप से डगमगा जाता है। लंबी अवधि के निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे घबराहट में आकर अपने शेयर कम दामों पर न बेचें, बल्कि बाजार की बुनियादी स्थिति को समझकर ही कोई नया कदम उठाएं। नियामक संस्थाएं और ब्रोकरेज फर्म इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं ताकि बाजार में किसी भी प्रकार की कृत्रिम अफवाहों या अफरातफरी को रोका जा सके। आने वाले सत्रों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बाजार इस निचले स्तर से कोई रिकवरी कर पाता है या फिर बिकवाली का यह दौर कुछ और दिन तक जारी रहेगा। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और अपने वित्तीय सलाहकारों से विचार-विमर्श करके ही पोर्टफोलियो में फेरबदल करने की सलाह दी जा रही है ताकि जोखिम को कम से कम किया जा सके।