कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      'शिमला में भुट्टो से मिली थीं इंदिरा', रूबियो से मुंबई में मिलने के विवाद पर बोले जयशंकर      सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      "ट्रंप के बयान बेतुके और अस्वीकार्य": मैक्रों ने फ्रांस में दंगों पर अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर किया पलटवार      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!      दिल्‍ली नगर निगम में विकास निधि-प्रदूषण पर AAP का हंगामा, पार्षदों में हाथापाई की नौबत; मेयर को सुरक्षित निकाला     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
व्यापार

सिलाई का कारोबार: कोरोना काल में नौकरी छूटने के बाद प्रवीण ने शुरू किया नया काम

कोरोना महामारी के दौरान नौकरी जाने के बाद बिहार के प्रवीण ने हार नहीं मानी। अपनी पत्नी के सहयोग और सिलाई के पुराने अनुभव को आधार बनाकर उन्होंने गांव में ही कपड़ों का उत्पादन शुरू किया। आज उनका यह काम एक बड़ा कारोबार बन चुका है जिससे कई लोगों को रोजगार मिल रहा है।

A
Ankit Yadav
01 अक्ट 2026, 16:48
सिलाई का कारोबार: कोरोना काल में नौकरी छूटने के बाद प्रवीण ने शुरू किया नया काम

कोरोना काल में नौकरी छूटने के बाद शुरू हुआ सिलाई का नया सफर

महामारी के समय अचानक रोजगार छिन जाने के बाद प्रवीण के सामने परिवार के भरण-पोषण का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। बेरोजगारी के दौर में इधर-उधर भटकने के बजाय उन्होंने अपने भीतर छिपे हुनर को ही अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बनाने का पक्का फैसला किया। उनकी पत्नी नगिया देवी ने इस मुश्किल समय में उनका पूरा साथ दिया और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए पूरा भरोसा दिलाया। पत्नी के इस प्रोत्साहन से प्रवीण का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया और उन्होंने पूरी मेहनत के साथ अपने काम को आगे बढ़ाने की ठान ली। शुरुआत में उनके पास केवल तीन सिलाई मशीनें थीं और सीमित संसाधन उपलब्ध थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इन तीन मशीनों के सहारे ही उन्होंने गांव में विभिन्न प्रकार के कपड़ों की सिलाई का कार्य चुपचाप और पूरी लगन के साथ शुरू कर दिया। उनकी पत्नी ने जीविका समूह से मिलने वाले ऋण का सही उपयोग किया और उस राशि को पति के इस नए रोजगार को स्थापित करने में लगा दिया। जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक ऋण के साथ-साथ जरूरी मार्गदर्शन भी दिया जाता है।

मशीनों की संख्या बढ़कर हुई 10 और 15 लोगों को मिला प्रत्यक्ष रोजगार

गांव में शुरू किया गया कपड़ों की सिलाई का यह छोटा सा काम समय के साथ तेजी से आगे बढ़ने लगा। प्रवीण द्वारा तैयार किए जाने वाले कपड़ों की उच्च गुणवत्ता की पहचान जब बाजार में फैली तो उनकी मांग में भी लगातार इजाफा होने लगा। कपड़ों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी कार्यक्षमता बढ़ाई और धीरे-धीरे सिलाई मशीनों की संख्या भी तीन से बढ़ाकर 10 कर दी। वर्तमान समय में प्रवीण के इस सिलाई केंद्र पर कुल 10 मशीनें काम कर रही हैं और इनके माध्यम से लगभग 15 स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिल रहा है। इस रोजगार से जुड़ने वाले लोगों में गांव की पांच महिलाएं भी शामिल हैं जो अपनी मेहनत के बल पर अपने परिवारों की आमदनी बढ़ाने में लगातार सहयोग कर रही हैं। जीविका से जुड़ी नगिया देवी बताती हैं कि संकट के उस दौर में हिम्मत हारने के बजाय सही दिशा में रास्ता तलाशना बहुत जरूरी था। उनके इस सराहनीय सहयोग और मार्गदर्शन से शुरू हुआ सिलाई का यह कार्य आज क्षेत्र के कई जरूरतमंद परिवारों के लिए रोजगार का एक मजबूत और स्थाई माध्यम बन चुका है।

दाउदनगर के थोक बाजार से जुड़कर अलग-अलग जिलों में पहुंच रहे हैं कपड़े

प्रवीण के हाथों तैयार होने वाले कपड़ों की बिक्री अब केवल उनके अपने गांव तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका दायरा काफी बड़ा हो चुका है। वे अपनी यूनिट में नाइटी, ट्रैकसूट, शर्ट और पैंट समेत कई प्रकार के आकर्षक और उपयोगी कपड़े बड़े पैमाने पर तैयार करते हैं। इन सभी तैयार कपड़ों को बिक्री के लिए दाउदनगर के थोक विक्रेताओं के पास भेजा जाता है जहां से इनकी आगे की आपूर्ति होती है। दाउदनगर के थोक बाजार से इन कपड़ों को राज्य के अलग-अलग जिलों और अन्य राज्यों के खुदरा बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जाता है। कपड़े तैयार करने के लिए आवश्यक कच्चा माल विशेष रूप से पटना से मंगवाया जाता है ताकि गुणवत्ता में कोई कमी न आए। गांव के छोटे से स्तर पर केवल तीन मशीनों से शुरू हुआ यह काम अब एक बड़े व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ चुका है। इस पूरे प्रयास के संबंध में जीविका के डीपीएम पवन कुमार ने इसे एक बेहद सराहनीय पहल करार दिया है जिससे ग्रामीण आत्मकेंद्रित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज