कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का जामनगर जाना क्या भारत की अहमियत बताता है?      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      असम सरकार का बड़ा फैसला, रिटायरमेंट से 1 साल पहले शुरू होगी पेंशन की प्रक्रिया      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      दिल्ली में AAP और कांग्रेस की पार्षद भिड़ीं, MCD सदन में खींचतान के बाद आई हाथापाई की नौबत     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
व्यापार

त्योहारी बाजार का हाल: नवरात्र के फलाहार पर महंगाई की भारी मार

नवरात्र के दौरान खाए जाने वाले फलाहार के दामों में अचानक बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। खुदरा बाजारों में व्रत की सामग्री महंगी होने से आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया है। बढ़ती कीमतों के कारण लोगों को अपने व्रत के बजट में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

A
Ankit Yadav
14 अक्ट 2026, 04:59
त्योहारी बाजार का हाल: नवरात्र के फलाहार पर महंगाई की भारी मार

फलाहार की कीमतों में भारी उछाल

त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में व्रत में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री की दरों में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिली है। आम जनता जो पूरे नौ दिनों तक विशेष प्रकार के आहार का सेवन करती है, उसे अब अपनी दैनिक जरूरत की चीजें खरीदने के लिए अधिक धनराशि चुकानी पड़ रही है। इस बार नवरात्र के विशेष फलाहार पर महंगाई की सीधी और गहरी मार पड़ी है, जिससे बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों को काफी हैरानी हुई है। खुदरा दुकानदारों का कहना है कि थोक बाजारों से ही माल महंगी दरों पर मिल रहा है, जिसके कारण खुदरा स्तर पर कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। व्रत के दिनों में सिंघाड़े का आटा, मखाने, साबूदाना, व्रत वाले चावल और विभिन्न प्रकार के फलों की मांग अचानक बहुत अधिक बढ़ जाती है। मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन का सीधा फायदा बिचौलियों और बड़े व्यापारियों द्वारा उठाया जा रहा है, जिससे आम ग्राहकों को परेशानी हो रही है। हर साल नवरात्र के अवसर पर इस तरह की मूल्य वृद्धि देखने को मिलती है, लेकिन इस बार कीमतों में हुआ यह बदलाव काफी तीखा और अचानक है।

उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा असर

बढ़ती हुई कीमतों ने आम परिवारों के रसोई बजट को पूरी तरह से असंतुलित कर दिया है, जिससे लोग काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। लोग नवरात्र के व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ रखते हैं, लेकिन इस बार आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। बाजार में मखाना, सिंघाड़ा आटा और काजू-बादाम जैसे मेवे खरीदने के लिए लोगों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने आए ग्रहणियों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार फलाहार का सामान खरीदना बहुत महंगा साबित हो रहा है। महंगाई का यह दौर केवल एक विशेष वस्तु तक सीमित नहीं है, बल्कि व्रत में काम आने वाली लगभग हर सामग्री के भाव बढ़ चुके हैं। दुकानदारों का तर्क है कि परिवहन लागत और मंडियों में पीछे से ही आवक कम होने के कारण खुदरा मूल्य में यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद आम जनता के लिए अपने त्योहार को उल्लास के साथ मनाना थोड़ा कठिन हो गया है, क्योंकि उन्हें अपनी जरूरत का सामान खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

त्योहारी महंगाई की आर्थिक पृष्ठभूमि

त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों में इस तरह की वृद्धि होना भारतीय खुदरा बाजारों का एक पुराना और जाना-पहचाना चक्र रहा है। जब भी कोई बड़ा व्रत या उत्सव आता है, तो बाजार में कुछ खास वस्तुओं की मांग रातोंरात कई गुना बढ़ जाती है। मांग में अचानक होने वाली इस भारी तेजी का असर तुरंत ही खुदरा और थोक दोनों बाजारों के भावों पर साफ दिखाई देता है। इस तरह की महंगाई से निपटने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर बाजार की निगरानी करने के दावे किए जाते हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर इसका असर बहुत कम देखने को मिलता है और आम आदमी को बढ़ी हुई कीमतों पर ही खरीदारी करनी पड़ती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस प्रकार की मौसमी महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना बेहद आवश्यक होता है। जब तक मंडियों से लेकर खुदरा दुकानों तक सामान की आवाजाही सुचारू नहीं होगी, तब तक त्योहारों के समय आम जनता को इस तरह की आर्थिक मार झेलनी पड़ती रहेगी। भविष्य में ऐसे मौकों पर राहत पाने के लिए उपभोक्ताओं को समझदारी से खरीदारी करने और पहले से बजट बनाकर चलने की सलाह दी जाती है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज