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ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता: ट्रंप की 100% टैरिफ चेतावनी के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत
अमेरिका के नवनिर्वाचित या संभावित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी व्यापार और आयातों पर लगाए जाने वाले भारी-भरकम करों की चेतावनी के बीच भारत सरकार ने अपनी कूटनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। नई दिल्ली ने दो टूक शब्दों में यह साफ कर दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोपरि है, जिसके चलते मास्को से क्रूड ऑयल की खरीद किसी भी दबाव में रोकी नहीं जाएगी।
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Ankit Yadav
16 सित 2026, 15:36
वैश्विक भू-राजनीतिक पटल पर एक बार फिर से ऊर्जा व्यापार को लेकर गर्माहट देखने को मिल रही है। हाल ही में अमेरिकी राजनीतिक गलियारों से आए बयानों और खास तौर पर ट्रंप की तरफ से संभावित एक सौ प्रतिशत शुल्क लगाने की बात सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मच गई है। इस तरह के प्रतिबंधात्मक उपायों का मुख्य उद्देश्य मॉस्को को मिलने वाले वित्तीय लाभों पर लगाम कसना है, लेकिन इसका सीधा असर उन उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी संसाधनों पर निर्भर हैं। भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सतर्क लेकिन दृढ़ रुख अपनाते हुए यह साबित कर दिया है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों से समझौता करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है।
राष्ट्रीय हित और आर्थिक प्राथमिकताएं
भारत की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताएं बहुत विशाल हैं और इन्हें पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल आयात करना एक अनिवार्य आवश्यकता है। जब पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब रूसी कच्चे तेल ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। उत्तर प्रदेश सहित देश के तमाम राज्यों के बाजार और आम उपभोक्ता भी इस बात से भली-भांति वाकिफ हैं कि ईंधन के दामों का सीधा असर आम जनजीवन की जरूरतों और महंगाई पर पड़ता है। ऐसे में किसी भी बाहरी महाशक्ति के दबाव में आकर अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना देशहित में उचित नहीं माना जा रहा है। सरकार का यह संदेश साफ है कि व्यापारिक फैसले हमेशा देश के नागरिकों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि नई दिल्ली का यह कड़ा जवाब पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंधों के साथ-साथ मॉस्को के साथ उसकी पुरानी और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी के संतुलन को भी दर्शाता है। भारत ने हमेशा से ही अपनी वैश्विक वार्ताओं में यह बात दोहराई है कि उसकी नीतियां किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके अपने चौदह करोड़ से अधिक नागरिकों के कल्याण के पक्ष में होती हैं। अमेरिकी टैरिफ की धमकियों के बीच इस तरह का स्पष्टीकरण देना यह बताता है कि भारतीय कूटनीति अब वैश्विक दबावों के आगे घुटने टेकने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च स्थान देती है। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि अमेरिका इस प्रतिक्रिया पर किस प्रकार की आधिकारिक कूटनीतिक चाल चलता है, लेकिन फिलहाल भारत ने अपने इरादे बिल्कुल साफ कर दिए हैं।
इस नीतिगत निर्णय से यह भी संदेश जाता है कि वैश्विक स्तर पर भारत अब एक ऐसा स्वतंत्र खिलाड़ी बन चुका है जो अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए खुद फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम है। चाहे वह उत्तर प्रदेश के किसानों की बात हो, उद्योगों की बात हो या फिर आम नागरिकों द्वारा वाहन चलाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की, हर जगह किफायती दामों पर तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। रूस के साथ तेल व्यापार के जारी रहने से न केवल आर्थिक मोर्चे पर स्थिरता बनी रहेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की यह छवि भी मजबूत होगी कि वह अपने आंतरिक और बाह्य निर्णयों में पूरी तरह स्वायत्त है।