अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही हाथ से बने कालीनों की मांग
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में तैयार होने वाले हाथ के कालीनों के लिए पूरी दुनिया में मांग लगातार बढ़ रही है। इस पारंपरिक उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक रूप से यह बात साझा की है कि सरकार कारीगरों के कौशल को नए अवसरों, बाजार और विकास के साथ जोड़ने का काम पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रही है। भदोही के इन प्रसिद्ध कालीनों को वैश्विक पहचान दिलाने में यहां के मेहनतकश कारीगरों की बहुत बड़ी भूमिका रही है। अधिकारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार यह उद्योग अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है। एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हस्तनिर्मित कालीन व्यापार मेले के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ भी इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस विशेष आयोजन के दौरान कालीन उद्योग से जुड़े हुए तमाम निर्यातकों, बड़े विक्रेताओं और प्रमुख उद्यमियों के बीच आपसी संवाद स्थापित होगा जिससे व्यापार को और अधिक विस्तार मिलने की पूरी उम्मीद है। कारीगरों के हुनर को सीधे वैश्विक मंच पर ले जाने की यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को काफी मजबूत कर रही है।
विकास परियोजनाओं की सौगात और मुख्यमंत्री का संबोधन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात पिछले दस वर्षों के दौरान लगभग 2.27 गुना तक बढ़ गया है। यह आंकड़ा अब दो लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है जिसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश देश का पांचवा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। इस शानदार उपलब्धि में अकेले भदोही के कालीन उद्योग का बहुत बड़ा योगदान शामिल है। भदोही, औराई और ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत एक हजार तीन सौ चालीस करोड़ रुपये से भी अधिक लागत वाली कुल एक सौ बारह विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात यहां की जनता को दी जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को तय नियमों के तहत हितलाभ भी वितरित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कारीगरों के हाथों को पूरा सम्मान दिया जा रहा है और उनके उद्यम का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं और भदोही जिला अब तेजी से समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहा है जो नए उत्तर प्रदेश की एक अलग पहचान बन चुका है।
कारीगरों के जीवन में आया बदलाव और विरासत की नई पहचान
भदोही के जिन कुशल कारीगरों ने अपने हाथों की कला से यहां के कालीनों को सात समंदर पार तक पहुंचाया था, उन्हें साल 2017 से पहले के समय में बुनियादी सुविधाओं और उचित अवसरों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। पिछली व्यवस्थाओं में कारीगरों को वह मंच और सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं जिनके वे असल हकदार थे। लेकिन अब वर्तमान डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में उन सभी बुनकरों और कारीगरों का हुनर सीधे विकास तथा वैश्विक बाजार के साथ मजबूती से जुड़ चुका है। यह पूरा बदलाव राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के एक बेहतरीन संगम के रूप में सामने आया है। इस पूरी प्रक्रिया से न केवल पारंपरिक कला को नया जीवन मिला है बल्कि कारीगरों का सामाजिक और आर्थिक स्तर भी काफी ऊंचा उठा है। सरकार की इन नीतियों और योजनाओं का उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम करने वाले हर हुनरमंद व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना है। आने वाले समय में इन पहलों के जरिए कालीन उद्योग से जुड़े लोगों को और अधिक लाभ मिलने की पूरी संभावना है जिससे इस ऐतिहासिक क्षेत्र का भविष्य और अधिक उज्जवल हो जाएगा।