आर्मी कैंटीन में भारत राइस की शुरुआत
भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई और राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ यानी नैफेड ने मिलकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब देश भर की सभी आर्मी कैंटीनों में भारत ब्रांड के चावल की बिक्री की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हमारे देश के सैनिकों और उनके परिवारों को रियादती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाला अनाज उपलब्ध कराना है। बाजार में लगातार बढ़ती खाद्य वस्तुओं की कीमतों के बीच यह कदम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगा। सरकार लंबे समय से रियादती दरों पर चावल और गेहूं की आपूर्ति बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रही है। इस योजना के शुरू होने से सेना के सेवारत जवानों के साथ-साथ पूर्व सैनिकों को भी सीधा लाभ पहुंचेगा। दोनों सरकारी एजेंसियां मिलकर इस आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह सुचारू रूप से संचालित करेंगी ताकि किसी भी कैंटीन में सामान की कोई कमी न हो पाए। कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट के माध्यम से इस चावल का वितरण बहुत जल्द शुरू कर दिया जाएगा और सभी जरूरी प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।
सूक्ष्म और लघु उद्योगों के एनपीए पर बयान
देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से जुड़े एनपीए यानी गैर-निष्पादित संपत्तियों के मुद्दों पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में छोटे उद्योगों के फंसे हुए कर्ज की स्थिति पर सरकार और नियामक एजेंसियां लगातार कड़ी नजर रख रही हैं। इस सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और इसके सुचारू संचालन के लिए वित्तीय सेहत का मजबूत होना बहुत जरूरी है। वित्तीय संस्थानों को ऐसे मामलों में अधिक संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम करने की आवश्यकता है ताकि छोटे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र के ऋण प्रवाह में भी सुधार देखा गया है और भविष्य में स्थिति और बेहतर होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से बाजार में सकारात्मक संदेश जाता है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है। सरकार इन उद्यमों की वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए कई तरह की नई नीतियों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है ताकि देश का औद्योगिक विकास तेजी से आगे बढ़ सके।
खाद्य सुरक्षा और आर्थिक वृद्धि की पृष्ठभूमि
सरकारी एजेंसियों द्वारा रियादती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की यह पूरी योजना देश की खाद्य सुरक्षा नीतियों का एक अहम हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने खुदरा बाजारों में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए भारत ब्रांड के तहत चावल, आटा और दालों जैसी कई जरूरी चीजें उचित दामों पर बेचना शुरू किया है। इस नीति से बाजार में जमाखोरों पर लगाम लगी है और आम आदमी को राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर, एमएसएमई क्षेत्र में एनपीए की स्थिति का अध्ययन करना आर्थिक विकास की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। जब छोटे उद्योगों को समय पर ऋण मिलता है और उनके पुराने कर्ज के मामले सुलझते हैं, तो रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन दोनों पहलों का सीधा संबंध देश के आम नागरिकों की जेब और देश के समग्र आर्थिक स्वास्थ्य से है। आने वाले दिनों में इन योजनाओं के और अधिक विस्तार की संभावना जताई जा रही है ताकि देश के दूरदराज के इलाकों में बैठे लोगों तक भी इनका पूरा लाभ पहुंचाया जा सके। सरकार की इन नीतियों का मुख्य उद्देश्य समावेशी विकास को बढ़ावा देना और देश के हर वर्ग को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।