समझौते की समयसीमा और मुख्य बातें व्यापारिक जगत से प्राप्त आधिकारिक जानकारियों के अनुसार भारत और न्यूजीलैंड के बीच तय हुआ यह नया मुक्त व्यापार समझौता आगामी 20 अक्टूबर से पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच विभिन्न प्रकार के सामानों और सेवाओं की आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा तथा आयात-निर्यात से जुड़ी कई बाधाएं दूर होंगी। भारतीय कारोबारियों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी पहुंच बनाने के रास्ते पूरी तरह से साफ हो चुके हैं और दोनों देशों के संबंधित वाणिज्य मंत्रालयों द्वारा इस दिशा में सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस समझौते के अस्तित्व में आने से दोनों ही राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थाओं को एक नया संबल मिलने की संभावना है क्योंकि इससे सीमा शुल्क में राहत और व्यापारिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
आर्थिक सहयोग और पृष्ठभूमि का दायरा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में इस प्रकार के मुक्त व्यापार समझौते देशों के बीच आपसी विश्वास और दीर्घकालिक संबंधों को प्रगाढ़ करने का काम करते हैं। पारंपरिक रूप से दोनों देशों के बीच कृषि उत्पादों, डेयरी, तकनीकी सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र में आपसी आदान-प्रदान की अपार संभावनाएं रही हैं जिन्हें अब एक विधिवत और कानूनी रूप से सशक्त ढांचे के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। इस तरह के समझौतों की रूपरेखा तैयार करने में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापार विशेषज्ञों ने लंबी वार्ताओं के दौर से गुजरते हुए आपसी हितों का संतुलन साधा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जानकारों का यह मानना है कि भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के इस दौर में बाजार पहुंच को आसान बनाना हर अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक हो जाता है ताकि आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखा जा सके और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के नए अवसरों को धरातल पर उतारा जा सके।
भविष्य की संभावनाएं और व्यापारिक असर आगामी 20 अक्टूबर से इस महत्वपूर्ण समझौते के प्रभावी होने के बाद दोनों देशों के औद्योगिक घरानों और निर्यातकों के सामने विकास के नए द्वार खुलेंगे। बाजार के जानकारों का आकलन है कि इससे न केवल द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की जाएगी बल्कि रोजगार के नए अवसरों का सृजन भी होगा। उपभोक्ता उत्पादों से लेकर तकनीकी सेवाओं तक के क्षेत्र में दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की क्षमताओं का भरपूर लाभ उठा सकेंगे। सरकार और उद्योग निकायों का यह भी मानना है कि इस प्रकार की पहलों से दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग का दायरा और अधिक विस्तृत होगा जिससे वैश्विक बाजार में उनकी स्थिति और अधिक मजबूत होगी। आने वाले हफ्तों में इस समझौते के क्रियान्वयन को लेकर दोनों पक्षों द्वारा कई जागरूकता कार्यक्रम और व्यावसायिक बैठकें आयोजित किए जाने की भी संभावना है ताकि छोटे और मध्यम उद्यम भी इस बड़े बदलाव का पूरा फायदा उठा सकें।