संयुक्त अभियान में सिम बॉक्स नेटवर्क का खुलासा
उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर आगरा में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने डिजिटल अपराधों पर नकेल कसते हुए एक बड़े गैरकानूनी नेटवर्क को बेनकाब किया है। स्थानीय पुलिस और दूरसंचार विभाग की टीमों ने मिलकर इस सुनियोजित अभियान को अंजाम दिया। पश्चिमी जोन के पुलिस उपायुक्त आदित्य कुमार ने एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान इस पूरी सफलता की जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस प्रकार वीवी एंटरप्राइज नामक एक पंजीकृत फर्म की आड़ में इन अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। इस छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों ने तकनीकी उपकरणों का एक बड़ा जखीरा अपने कब्जे में ले लिया। बरामद किए गए साजो-सामान में कुल आठ उन्नत किस्म के सिम बॉक्स, दो सौ इक्कीस सिम कार्ड और छियानवे रेडियो एंटेना शामिल हैं। इसके अलावा पांच लैपटॉप, एक डेल कंपनी का सर्वर और अन्य संचार नेटवर्क उपकरण भी मौके से जब्त किए गए हैं। अधिकारियों ने इन सभी सामग्रियों को सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। यह कार्रवाई साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के खिलाफ एक बहुत बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि इस तरह के उपकरण देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा करते हैं।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामदगी के ब्योरे
इस सनसनीखेज मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने तकनीकी निगरानी और पुख्ता सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। पश्चिमी जोन के डीसीपी आदित्य कुमार ने बताया कि इस आपराधिक कृत्य में संलिप्त होने के आरोप में अभी तक दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस हिरासत में लिए गए इन दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क के अन्य गुप्त मोर्चों का भी पता लगाया जा सके। ये शातिर ठग अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर अपराधियों या बाहरी जालसाजों के सीधे निर्देशों पर काम कर रहे थे। इन अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों की मदद से वे विदेशों से आने वाली अवैध कॉल्स को स्थानीय नेटवर्क पर रूट किया करते थे। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य कॉलर की असली पहचान छिपाना और कानून की पकड़ से बचना था। इसके माध्यम से ये अपराधी भोले-भाले नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट या विभिन्न मामलों में रिकवरी के नाम पर बुरी तरह डराते और धमकाते थे। लोगों के मन में भय पैदा कर ये शातिर ठग उनसे भारी भरकम रकम वसूलते थे और अवैध रूप से अपनी तिजोरी भरते थे। पुलिस अब इन गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी बारीकी से जांच कर रही है।
दस्तावेजों की जांच और अन्य आरोपियों की तलाश जारी
इस बड़े खुलासे के बाद से ही पूरे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जांच अधिकारियों की टीमें वीवी एंटरप्राइज फर्म से जुड़े सभी प्रकार के व्यावसायिक और सरकारी दस्तावेजों का गहन परीक्षण कर रही हैं। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस फर्म के पास किस अधिकार के तहत इन उपकरणों को रखने का लाइसेंस था या फिर यह पूरी कंपनी ही केवल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खड़ी की गई थी। मुख्य दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्ध लोगों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। देश और समाज को नुकसान पहुंचाने वाले इस प्रकार के साइबर सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए कई ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस जांच के दायरे में आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की डिजिटल ठगी या डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मिलने वाली धमकियों से डरे नहीं और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें ताकि समय रहते ऐसे जालसाजों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जा सके।